ऊना। जिले में गर्मी की दस्तक के साथ आग घटनाओं में इजाफा होने लगा है। बीते वीरवार रात को जिला मुख्यालय के साथ लगते बसाल में भीषण अग्निकांड में 150 झुग्गी-झोंपड़ियां जलकर राख हो गई। यह झुग्गियां सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर बनाई गई थीं। प्रशासन ने अतिक्रमण पर सख्त रुख दिखाते हुए अग्निकांड प्रभावितों को कोई मुआवजा राशि जारी नहीं करने का फैसला लिया है।
भीषण अग्निकांड ने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर बनाई जा रहीं झुग्गी-झोपड़ियों को मामला फिर से चर्चा में ला दिया है। बड़ा सवाल है कि रात्रि के दौरान हुई घटना में यदि कोई हताहत हो जाता है तो जिम्मेवार कौन होता। आखिर किसकी शह पर जिले में सरकारी जमीन में झुग्गियां बन रही हैं। प्रशासन के नाक तले भी इस तरह की घटनाएं होने के बाद दोबारा झुग्गियां स्थापित हो रही हैं। तीन भीषण अग्निकांड के बावजूद प्रशासन सरकारी जमीन पर स्थापित हो रही झुग्गियों को रोकने को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठा पाया है। गर्मी के सीजन में घासफूस से बनी यह झोपड़ियां किसी बारूद से कम नहीं होती है। एक हल्की सी चिंगारी ही भीषण अग्निकांड में तब्दील हो जाती है।
बता दें कि जिले में बीते 16 दिनों की बात करें तो झुग्गी-झोपड़ियों में आग घटना के चार बड़े मामले सामने आ चुके हैं। बाथू-बाथड़ी, ऊना शहर व बसाल में तीन भीषण अग्निकांड इनमें शामिल हैं। आग की इन घटनाओं में 359 झुग्गी-झोपड़ियां जलकर राख हो चुकी है। ऊना दमकल विभाग के क्षेत्र में ही पंद्रह दिनों के भीतर आग की 12 घटनाएं सामने आ चुकी हैं। भीषण गर्मी का प्रकोप इसी तरह बना रहा तो आग घटनाओं में इजाफा हो सकता है। उधर, डीसी राघव शर्मा ने बताया कि बसाल में हुए अग्निकांड में झुग्गियों का सरकारी जमीन में अतिक्रमण होना पाया गया है। ऐसे में कोई मुआवजा नहीं दिया गया है। उन्होंने बताया कि नियमानुसार कार्रवाई अमल पर लाई जा रही है।
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बाथू में फिर स्थापित हुई झुग्गियां
बाथू-बाथड़ी में 31 मार्च को हुए अग्निकांड में 150 झुग्गी-झोंपड़ियां जल गई थी। इसके बाद यहां दोबारा सरकारी जमीन पर झुग्गियां स्थापित हो गई हैं। हालांकि, पुलिस ने फिर से झुग्गियां बनाकर रहने लगे प्रवासी लोगों को चेतावनी भी दी है, लेकिन इसका असर होता नजर नहीं आ रहा है।