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Una News: बारिश न होने से फिरा किसानों की उम्मीदों पर पानी

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बोले-जंगल बचाए जाते और खनन पर रोक लगती तो आज ये हालात न होते
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संवाद न्यूज एजेंसी
घनारी (ऊना)। क्षेत्र में बारिश न होने से खेतीबाड़ी पर निर्भर किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है। पिछले माह ही किसानों ने गेहूं की बिजाई की थी, लेकिन मौसम की अनिश्चितता ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है। यहां की मुख्य फसलें गेहूं और मक्की है। इन्हें बीजकर किसान जीवनयापन करते हैं लेकिन इस बार बारिश न होने से निराश हैं। किसान और क्षेत्रवासी मानते हैं कि जंगलों की बेतहाशा कटाई, अत्यधिक खनन और पर्यावरणीय असंतुलन के कारण यह समस्या और गहराती जा रही है। सिंचाई की सुविधा कुछ क्षेत्रों में ही उपलब्ध है लेकिन कई जगहों पर सिंचाई की नालियां बंद हो गई हैं। वहीं, जहां सिंचाई की सुविधा नहीं है, वहां पर किसान पूरी तरह से बारिश पर निर्भर हैं। ऐसे में बारिश न होने के कारण फसल बर्बाद हो रही है। जमीनें बंजर हो चुकी हैं। किसानों की इन चिंताओं को देखते हुए क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सिंचाई व्यवस्थाओं में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। प्रशासन को जल्द से जल्द प्रभावी समाधान निकालना होगा ताकि किसानों को राहत मिल सके।
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किसान दीपक ने बताया कि हमने गेहूं की बिजाई की है, लेकिन बिना बारिश के फसल कैसे उगेगी। सिंचाई की नालियां बंद हैं और जमीन सूखी पड़ी है। सरकार को हमारी समस्या का समाधान करना चाहिए।
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विनोद कुमार ने कहा कि हमारे परिवार की पूरी आमदनी खेती पर निर्भर है। पिछले दो साल से बारिश समय पर नहीं हो रही। अब तो पानी के लिए भगवान से ही प्रार्थना करनी पड़ रही है।
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युवा किसान निखिल का कहना है कि जंगल कटने और खनन के कारण बारिश में कमी आई है। अगर यही हाल रहा तो हमें गांव छोड़कर काम की तलाश में बाहर जाना पड़ेगा।
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सामाजिक कार्यकर्ता हरीश कुमार ने मांग की है कि सरकार को जल संरक्षण योजनाएं लानी चाहिए। अगर जंगल बचाए जाते और खनन पर रोक लगती तो आज ये हालात नहीं होते।
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