युवा समाज को तेजी से अपनी गिरफ्त ले रहा नशा माफिया
गांव, मोहल्ले और घरों के आसपास नशे के सौदागर सक्रिय
संवाद न्यूज एजेंसी
नंदपुर (ऊना)। जिले में नशा माफिया के खिलाफ कार्रवाई के दावों के बीच एक ऐसी सच्चाई सामने आई है, जो प्रशासन, समाज और कानून तीनों के लिए गंभीर चेतावनी है। चिट्टा और अन्य ज़हरीले नशे अब ‘बिट’ (बहुत कम मात्रा) में बेचे जा रहे हैं। इतनी कम मात्रा में मिलने के कारण आरोपी पकड़े जाने पर कई बार सख्त धाराओं से बच निकलते हैं। यही कारण है कि नशा माफिया बेखौफ है और युवा तेजी से इसकी गिरफ्त में फंस रहे हैं। यह समस्या अब किसी दूरदराज़ इलाके तक सीमित नहीं रही। गांव, मोहल्ले और हमारे घरों के आसपास इसकी मौजूदगी महसूस की जा रही है। कम कीमत और आसानी से उपलब्ध होने के कारण यह युवाओं के लिए सबसे खतरनाक जाल बन गया है। लोग बताते हैं कि ‘बिट’ में मिलने वाला नशा पहली नजर में मामूली लगता है, लेकिन यही भ्रम युवाओं को लत की ओर धकेल देता है।
स्थानीय नागरिकों और विशेषज्ञों की राय
नागरिक आशुतोष शर्मा का कहना है कि नशा माफिया कानून की खामियों का फायदा उठा रहा है। बिट में बिकने वाला नशा सबसे खतरनाक है, क्योंकि पकड़े जाने पर सख्त कार्रवाई नहीं हो पाती। युवा अगर बर्बाद हो रहे हैं, तो इसकी सबसे बड़ी वजह यही है।
खाद्य तथा नागरिक आपूर्ति विभाग से सेवानिवृत्त जगदीश राणा ने कहा कि नशा अब सामाजिक संकट बन चुका है। कानून की कमजोरी का माफिया फायदा उठा रहा है। समाज को इस पर चुप नहीं रहना चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्त विजय शर्मा ने कहा कि कम मात्रा में मिलने वाला नशा स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक होता है। युवा सोचते हैं कि थोड़ी मात्रा नुकसान नहीं पहुंचाएगी, जबकि असल में यही लत की शुरुआत होती है।
स्थानीय नागरिक मनोज कौशिक ने कहा कि आज हर गली में नशे की चर्चा है। कार्रवाई जरूरी है, लेकिन उससे भी जरूरी है कि लोग डर छोड़कर प्रशासन का सहयोग करें।
कोट्स
डीएसपी अनिल पटियाल के अनुसार पुलिस क्षेत्र में नशा कारोबारियों की पहचान कर उनके खिलाफ लगातार कड़ी कार्रवाई कर रही है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों पर निगरानी रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें। पुलिस का कहना है कि समाज के सहयोग के बिना इस मुहिम को सफल नहीं बनाया जा सकता।