कृषि विभाग के अधिकार मक्की की फसल को हुए नुकसान का जायजा लेते हुए।
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ऊना। कृषि विभाग ने जिले के बसाल, चलोला, बडसाला सहित अन्य गांवों में फॉल आर्मी वर्म से मक्की को हुए नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने किसानों को कीट के प्रकोप से बचाव की जानकारी भी दी। अब तक जिले में चार हजार हेक्टेयर भूमि फॉल आर्मी वर्म से क्षतिग्रस्त हो चुकी है।
कृषि उपनिदेशक डॉ. अतुल डोगरा ने बताया कि इस दौरान किसानों को फॉल आर्मी वर्म कीट से रोकथाम के लिए एकीकृत कीट प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि फसल बुआई से पहले खेत की गहरी जुताई कर नीम केक 10 किलोग्राम प्रति कनाल का प्रयोग करें ताकि इस कीट की वयस्क अवस्था को कम किया जा सके। रसायनिक खादों का संतुलित मात्रा में प्रयोग करें। गहरे प्रकाश और शिकारी पक्षियों के लिए प्यूपा को उजागर करने के लिए खेतों में गहरी जुताई करें।
डॉ. अतुल डोगरा ने बताया कि बुआई के बाद जल्द ही फेरोमोन्स ट्रैप 4 प्रति एकड़ स्थापित करें। यदि संक्रमण 10 प्रतिशत से अधिक है, तो कीट की रोकथाम के लिए इमामेक्टिन बेंजोएट 5 प्रतिशत एसजी 8 ग्राम प्रति लीटर पानी प्रति कनाल के हिसाब से स्प्रे करें। बेसल खुराक के रूप में एनपीके की केवल अनुशंसित खुराक लागू करें।
मक्की के खेतों के चारों और नैपियर घास की 3-4 पंक्तियां ट्रैप फसल के रूप में लगाएं। फॉल आर्मी वर्म के अंडों और लारवा को हाथों से नष्ट करें। निरीक्षण के दौरान जिला कृषि अधिकारी डॉ. संतोष शर्मा, विषयवाद विशेषज्ञ डॉ. संजीव कुमार, सहायक कृषि अधिकारी बलदेव शर्मा, कृषि प्रसार अधिकारी राजा राम शर्मा उपस्थित रहे।