ऊना। जिला में पहली से आठवीं तक की कक्षाओं के लिए बुधवार से मिड-डे-मील दोबारा शुरू हो गया। इस दौरान करीब 71 प्रतिशत बच्चों ने स्कूल में बने दोपहर के खाने का स्वाद चखा। करीब दो साल बाद शुरू हुए मिड-डे-मील को लेकर स्कूलों में व्यवस्थाएं चाक-चौबंद नजर आईं।
कोरोना संक्रमण के कारण बीते करीब दो साल से स्कूलों में बंद मिड-डे-मील को पूरी तैयारी के साथ बुधवार को शुरू कर दिया गया। स्कूलों के रसोईघरों में सफाई व्यवस्था दुरुस्त नजर आई। वहीं स्कूलों में मिलने वाले दोपहर के खाने को बच्चों ने भी बड़े चाव के साथ खाया। इस दौरान कोरोना संक्रमण को ध्यान में रखते हुए जरूरी नियमों का बच्चों से पालन करवाना एक चुनौती बना रहा। वहीं पहले से तीसरी तक के अधिकतर बच्चे ऐसे थे, जिन्होंने पहली बार मिड-डे-मील का स्वाद चखा।
बुधवार को प्री-प्राइमरी कक्षाओं के कुल 3429 में से 2027 बच्चे (59.11 प्रतिशत), पहली के 4451 में से 3105 (69.76 प्रतिशत), दूसरी के 4528 में से 3192 (70.49 प्रतिशत), तीसरी कक्षा के 4949 में से 3419 (69.04 प्रतिशत), चौथी के 5058 में से 3482, पांचवीं के 5033 में से 3619 (71.91), छठी के 4528 में से 3446 (76.10 प्रतिशत), सातवीं के 4613 में से 3429 (74.33 प्रतिशत), आठवीं के 4561 में से 3354 (73.54%) बच्चे स्कूल पहुंचे।
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उपनिदेशक ने जांची व्यवस्था
ऊना। मिड-डे-मील की व्यवस्था को जांचने के लिए जिला शिक्षा विभाग की टीम औचक निरीक्षण पर रही। इस दौरान उपनिदेशक जिला शिक्षा विभाग देवेंद्र चंदेल ने खुद कई स्कूलों में जाकर मिड-डे-मील की गुणवत्ता परखी और सफाई व्यवस्था का भी जायजा लिया। उन्होंने जिला के सभी स्कूल प्रमुखों को आदेश दिए कि कोविड-19 को ध्यान में रखते हुए समस्त बच्चों की थर्मल स्कैनिंग हो और मास्क पहनना भी सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि खाना पकाने वाले कर्मचारी भी मास्क लगाकर रखें और थर्मल स्कैनिंग समेत तमाम सावधानियां अपनाएं। कहा कि स्कूलों में बच्चों को पीने का पानी मुहैया करवाने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि पानी कि टंकियों को समय रहते साफ किया जाए। देवेंद्र चंदेल ने कहा कि बच्चों को उचित शारीरिक दूरी के साथ ही खाना खिलाएं और एक दूसरे के वर्तन, मास्क व रूमाल आदि का इस्तेमाल न करें।