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Una News: दहेज प्रताड़ना और मारपीट के मामले में आरोपी बरी

सार

ऊना में दहेज प्रताड़ना मामले में अपर सत्र न्यायाधीश-द्वितीय कांता वर्मा ने निचली अदालत का दोषसिद्धि का फैसला निरस्त कर आरोपियों को बरी किया। यदि जुर्माना राशि जमा हुई थी, तो वह लौटाई जाएगी।
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अपर अदालत ने निचली अदालत का फैसला किया निरस्त, लौटानी होगी जुर्माने की राशि
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क्रॉसर

सलोह गांव की महिला ने रक्कड़ कॉलोनी में ससुराल वालों पर लगाए थे आरोप


अदालत से

संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। दहेज के लिए प्रताड़ित करने के एक मामले में निचली अदालत के फैसले को निरस्त करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश-द्वितीय ने आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया है। शिकायतकर्ता सलोह गांव की इंदु बाला ने 6-3-2018 को पुलिस अधीक्षक ऊना के पास दर्ज करवाई शिकायत में आरोप लगाया था कि 29-2-2016 को उसकी शादी हिंदु रीति रिवाज के साथ मनदीप रनौत पुत्र कुलवंत सिंह रनौत निवासी रक्कड़ कॉलोनी ऊना के साथ हुई थी।
उस समय माता-पिता ने हैसियत के अनुसार दहेज, उपहार और सोने के आभूषण आरोपी के परिवार की मांग के अनुसार दिए थे। शादी के एक हफ्ते बाद आरोपी ने प्रताड़ित करना शुरू कर दिया कि शादी किसी महल में नहीं हुई थी, न ही अच्छी व्यवस्था थी। न ही पर्याप्त दहेज दिया है। आरोपी पति को मनाने की कोशिश की, लेकिन अन्य आरोपियों के कहने पर उसने तलाक देने व दुर्व्यवहार के बारे में किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। चरित्र पर भी आरोप लगाए। आरोप था कि पति आदतन शराबी है और बिना कारण पीटता था।
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बाद में व्यथा अपने माता-पिता को बताई। आरोपी ने उसके माता-पिता को बुलाया और साथ ले जाने को कहा। आरोप था कि जनवरी 2017 में ससुर उसे ऊना बस स्टैंड पर छोड़ गया और तब से वह अपने पिता के साथ सलोह में रह रही है। भरण-पोषण करने के लिए आय का कोई स्रोत नहीं है। जबकि पति चिकित्सा प्रतिनिधि है। जनवरी 2017 में उसने भरण-पोषण करने से इन्कार कर दिया था। शिकायत कर्ता ने आरोपी पति मनदीप, उनकी माता तृप्ता देवी और पिता कुलवंत रनौत के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। निचली अदालत ने शिकायतकर्ता के आरोप को सही मानते हुए अभियुक्त मनदीप रनौत और उसने परिवार को दोषी ठहराते हुए साधारण कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी।
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इसके बाद अभियुक्तों ने फैसले को लेकर याचिका दायर कर खुद को निर्दोष बताया और मुकदमे की मांग की थी। मामले में सभी पक्षों की सुनवाई के बाद बुधवार को अपर सत्र न्यायाधीश-द्वितीय कांता वर्मा ने फैसला सुनाया। उन्होंने फैसले में कहा कि अपीलकर्ता अभियुक्त के विरुद्ध पारित दोषसिद्धि का आक्षेपित निर्णय और दंड का आदेश अपास्त किया जाता है। अभियुक्त को भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए और 506 के तहत आरोप से बरी किया जाता है। यदि जुर्माना राशि पहले जमा कर दी है तो अभियुक्त को वापस कर दी जाए। निचली अदालत की फाइल इस निर्णय की प्रति सहित वापस भेजी जाए।
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