सरकारी और निजी क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों पर काम का बोझ बढ़ गया है। इसका असर उनकी मानसिक स्थिति पर भी पड़ रहा है। यही वजह है कि वह अवसाद का शिकार हो रहे हैं। आईजीएमसी शिमला के मनोचिकित्सा विभाग की ओपीडी में आने वाले मरीजों की जांच में यह तथ्य सामने आए हैं। चिकित्सकों के मुताबिक कार्यालय में काम का बोझ और नौकरी को लेकर असुरक्षा कर्मचारियों को मानसिक तनाव की ओर धकेल रही हैं।
आईजीएमसी के मनोचिकित्सा विभाग के एसोसिएट प्रो. डॉ. देवेश शर्मा ने यह जानकारी दी। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में रोजाना औसतन 100 मरीजों की ओपीडी होती है। इनमें 25 से 30 मरीज ऐसे होते हैं जोकि कार्यालयों में काम करते हैं। दफ्तरों में में होने वाली पॉलिटिक्स के कारण या ऊंचे ओहदों पर बैठे बॉस के इन कर्मियों के साथ सामान्य व्यवहार न होने से वह मानसिक रूप से परेशान हो रहे हैं। इसमें 20 से 40 साल के लोगों की संख्या अधिक है। चिकित्सकों का कहना है कि कार्यस्थल पर कर्मचारियों को बेहतर वातावरण उपलब्ध करवाकर उनके मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है।