संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। अश्वनी पेयजल योजना से भरे पानी के सैंपल की वायरोलॉजी रिपोर्ट 14 दिन बाद भी जलशक्ति विभाग के पास नहीं पहुंची है। इसके चलते योजना से पिछले दो सप्ताह से पानी की लिफ्टिंग नहीं हो पा रही है। अब विभाग अश्वनी योजना को शुरू नही कर पा रहा है।
वहीं रिपोर्ट कब तक आएगी, इसका पता है। जल शक्ति विभाग ने झागयुक्त पानी आने के बाद अश्वनी योजना से दो पानी के सैंपल भरे थे जिन्हें जांच के लिए सीटीएल कंडाघाट और एनआईवी पुणे भेजा गया था। अभी तक पुणे से विभाग के पास रिपोर्ट नहीं आई है।
हालांकि इससे गिरि योजना से लिफ्टिंग तो बढ़ाई गई है। अगर गिरि योजना में शट डाउन होता है, या मोटर में कोई दिक्कत आती है तो शहर को पानी के लिए तरसना पड़ सकता है। अश्वनी खड्ड से 30 लाख लीटर पानी रोजाना शहर को लिफ्ट होता है। इसके बंद होने से अब गिरि से अतिरिक्त पानी लिफ्ट किया जा रहा है।
हालांकि विभाग की ओर मंगलवार को रिपोर्ट आने का दावा किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही योजना से पानी लिफ्टिंग के बारे में निर्णय होगा। फिलहाल पेयजल किल्लत को कम करने के लिए विभाग आठ मोटरों से पानी लिफ्ट कर रहा है। सोमवार को भी गिरि योजना से करीब 92 लाख पानी की लिफ्टिंग की गई है।
27 मार्च को अश्वनी पेयजल योजना में झागयुुक्त गंदा पानी आने पर ग्रामीणों ने तुरंत खेतों की सिंचाई बंद कर दी। पशुओं को भी पानी नहीं दिया और इसकी सूचना विभाग को दी। विभाग ने मौके पर पहुंचकर पानी की लिफ्टिंग रोकने के आदेश दिए।
28 मार्च को पानी के दो सैंपल भर एक सैंपल सीटीएल कंडाघाट बैक्टीरिया जांच जबकि दूसरा सैंपल एनआईवी पुणे वायरोलॉजी जांच के लिए भेजा गया था। करीब एक सप्ताह के भीतर जल शक्ति विभाग के पास सीटीएल कंडाघाट से पानी जांच की रिपोर्ट पहुंची जिसमें सैंपल पास था।
हालांकि पुणे से परीक्षण की रिपोर्ट नहीं आई है। इसके चलते गिरि योजना ही पानी का एकमात्र सहारा बनी हुई है। शहर में पानी की किल्लत न हो, इसके लिए गिरि योजना से लिफ्टिंग बढ़ा दी है और रोजाना 80 से 90 लाख लीटर पानी लिफ्ट किया जा रहा है।
उधर, जल शक्ति विभाग के अधिशासी अभियंता ई. रविकांत शर्मा ने कहा कि पुणे से मंगलवार तक अश्वनी योजना से भरे सैंपल की रिपोर्ट आ जाएगी। इसके बाद आगामी निर्णय लिया जाएगा। वर्तमान में स्थिति ठीक है और गिरि योजना से पानी लिफ्ट किया जा रहा है।