कोविड के बाद स्कूल खुलने पर कुछ विद्यार्थी शब्द ज्ञान में कमजोर दिखे जबकि कुछ शब्द उच्चारण सही नहीं कर पाए। अध्यापकों के समक्ष बच्चों को अक्षरों का ज्ञान करवाने के साथ सही उच्चारण करवाना चुनौती बन गई।
इस क्षति को पूरा करने के लिए अध्यापक अब बच्चों को एक हॉल में बैठाकर ब्लैक बोर्ड पर प्रतियोगिताएं करवा रहे हैं। अंताक्षरी से उनका ज्ञान बढ़ाया जा रहा है। बच्चे भी ब्लैक बोर्ड पर प्रतियोगिता में दिलचस्पी ले रहे हैं। सुबह की प्रार्थना सभा के समय बच्चों को योग करवाया जा रहा है। बच्चे 10 से 15 मिनट तक ध्यान लगा रहे हैं। इससे बच्चों का पढ़ाई में मन लग रहा है, वे सीख भी जल्दी रहे हैं।
अध्यापक राकेश गुप्ता ने कहा कि कोविड के दौर में भी विद्यार्थियों को अच्छी शिक्षा देने के लिए ऑनलाइन पढ़ाई के साथ उनका मनोरंजन भी करवाया जा रहा है। ऑनलाइन डांस, संगीत और चित्रकला प्रतियोगिताएं करवाई गईं। अब स्कूलों में उनका मन लगा रहे हैं, कक्षाओं में प्रतियोगिताओं से शिक्षा ज्ञान भी दिया जा रहा है।
ब्लैक बोर्ड दिया जा रहा अक्षर ज्ञान
अध्यापक अशोक कुमार ने बताया कि स्कूल खुलने के बाद ऑफलाइन कक्षाओं में बच्चों को अक्षरों के ज्ञान में परेशानी झेलनी पड़ रही है। कोविड में छोटी कक्षाओं से तीसरी कक्षा में पहुंचे बच्चों की लिखावट भी खराब है। ब्लैक बोर्ड पर सभी विद्यार्थियों को अक्षर ज्ञान देने के लिए प्रतियोगिताएं करवाई जा रही हैं। बच्चों को एक शब्द से एक अर्थ निकालने के बारे में अंताक्षरी से ज्ञान दिया जा रहा है।
कक्षाओं में सामान्य ज्ञान की कर रहे प्रतियोगिताएं
छात्र रोहित ने बताया कि स्कूल में ऑनलाइन पढ़ाई से अच्छा लग रहा है। कक्षाओं में पढ़ाई के साथ मनोरंजन भी करवाया जा रहा है। विद्यार्थियों की दो टीमें तैयार कर अक्षर ज्ञान और सामान्य ज्ञान के प्रश्न भी पूछे जा रहे हैं। इसमें विजेता टीम को सम्मानित भी किया जाता है।
कोविड का डर खत्म
छात्र तनिश कोविड के बीच स्कूलों में बार-बार हाथ धोने की जानकारी अध्यापक दे रहे हैं। इसके लिए कक्षाओं के बाहर हाथ धोने का स्थान भी बनाया गया है। पहले कोविड से डर लगता था लेकिन अब कोविड की जानकारी के बाद डर खत्म हो गया है।
मोबाइल की आदत होने लगी खत्म
अभिभावक महेश ठाकुर ने बताया कि फोन पर ऑनलाइन कक्षा के साथ बच्चों को इसकी लत भी लग गई थी। अब स्कूल खुलने के बाद बच्चों की लत खत्म होने लग गई है। विद्यार्थी अब अपने होमवर्क को पूरा करने में ही व्यस्त रहते हैं। इससे बहुत कम मांग फोन की कर रहे हैं।
ऑनलाइन कक्षा से बच्चे भी बने स्मार्ट
अभिभावक रविंद्र वर्मा ने बताया कि स्मार्ट फोन पर बच्चों की कक्षाएं लग रही थीं। इस बीच बच्चों की दिनचर्या खराब हो गई थी। सुबह उठने और रात को सोने का कोई समय नहीं था। अब सुबह स्कूल जाने के लिए बच्चे उठकर स्कूल जाने की तैयारी शुरू कर देते हैं।