लोगों की सुरक्षा के लिए वर्ष 1972 में बनी कुठाड़ पुलिस चौकी के कर्मचारी अब भी पैदल ही अपराधियों का पीछा करते हैं।
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लोगों की सुरक्षा के लिए वर्ष 1972 में बनी कुठाड़ पुलिस चौकी के कर्मचारी अब भी पैदल ही अपराधियों का पीछा करते हैं। ऐसे में कई बार अपराधी वारदातों को अंजाम देकर गाड़ी में फरार हो जाते हैं और पुलिस लिफ्ट के इंतजार में रहती है। कर्मचारियों को बसों में या फिर किसी के स्कूटर तथा अन्य वाहनों में लिफ्ट लेकर जाना पड़ता है। पुलिस जब तक मौके पर पहुंचती है तब तक चोर उचके वहां से नौ ग्यारह हो जाते हैं।
चौकी में सरकारी वाहन की कोई सुविधा न होने से पुलिस कर्मियों को शिकायतों का निपटारा करने के लिए बसों और लोगों का सहयोग मजबूरी में लेना पड़ता है। पुलिस चौकी कुठाड़ को नाकेबंदी और अन्य संगीन आपराधिक घटनाओं के दौरान वाहन न होने से अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। चौकी में शिकायत को आने वाले लोग भी पुलिस के पास वाहन न होने से अकसर उनके लेट होने से परेशान रहते हैं। पंचायत प्रधान रामनाथ वशिष्ठ और उपप्रधान पवन शर्मा ने कहा कि कुठाड़ चौकी में वाहन की व्यवस्था की जानी चाहिए। इससे जन शिकायतों की सुनवाई में पुलिस समय पर पहुंच सकेगी। उन्होंने कहा कि अपराधियों को पकड़ने के लिए भी चौकी में वाहन की व्यवस्था जरूरी है।
चौकी के अधीन 14 पंचायतें
कुठाड़ पुलिस चौकी के अधीन 14 पंचायतें आती हैं। इस क्षेत्र में किसी भी शिकायत का निपटारा करने के लिए जवानों को अपने निजी वाहनों अथवा दूसरे वाहनों से लिफ्ट के इंतजार में रहना पड़ता है। ऐसे में शिकायतकर्ता स्वयं पुलिस की इस वाहन समस्या से परेशान हैं।
जल्द मिलेगी नई बाइक : एसपी
एसपी अंजुम आरा ने बताया कि जिला के विभिन्न स्टेशनों से नौ पुरानी बाइकों को कंडम किया है। इसमें कुठाड़ चौकी भी शामिल है। इनकी जगह नई मोटरसाइकिलों का प्रपोजल पुलिस मुख्यालय को भेजा है। जल्द ही दुपहिया वाहन कुठाड़ चौकी को मिल जाएगा।
पुलिस चौकी को नहीं मिलते बड़े वाहन
पुलिस चौकियों के लिए बड़े चौपहिया वाहन का प्रावधान ही नहीं है। प्रदेश की चौकियों में पुलिस को केवल एक दुपहिया वाहन के सहारे ही कानून व्यवस्था को देखना पड़ रहा है। ऐसे में पुलिस कर्मियों से मुस्तैदी और तुरंत कार्रवाई की अपेक्षा कैसे की जा सकती है। नेता अक्सर मंचों से सुरक्षा और कड़ी करने के दावे तो करते हैं लेकिन धरातल की तस्वीर कुछ और ही है। आज हर किसी के पास जहां वाहन हैं वहीं प्रदेश की पुलिस चौकियों को दोपहिया वाहनों के सहारे ही रखा है।