संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मपुर (सोलन)। कालका-शिमला नेशनल हाईवे-5 पर इस बार भूस्खलन के बाद वाहनों के पहिये नहीं थमेंगे। इसके लिए परवाणू-सोलन (चंबाघाट) फोरलेन निर्माण कर रही कंपनी ने प्लान तैयार किया है। कंपनी का दावा है कि प्लान के मुताबिक कार्य होने से लोगों को हाईवे पर बरसात में कोई परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी।
हाईवे पर अति संवेदनशील जगहों को भी चयनित कर लिया है। इन जगहों पर कंपनी ने मशीनरी के साथ टीम को भी तैनात कर दिया है। रात में पहाड़ों पर टॉर्च से निगरानी की जाएगी। कंपनी ने हाईवे पेट्रोलिंग टीम को रात में हाईवे के पांच से छह चक्कर लगाने के निर्देश दिए हैं।
परवाणू से सोलन (चंबाघाट) तक बरसात में बारिश के बाद पहाड़ों से पत्थर और मलबा गिरना शुरू हो जाता है। ऐसे में वाहन चालकों को जोखिम भरा सफर करना पड़ता है। अधिकतर जोखिम तंबू मोड़, जाबली, सनवारा, धर्मपुर, पट्टा मोड़ और बड़ोग बाईपास पर बना हुआ है।
यहां पर हल्की बारिश में भी पत्थर और मलबा सड़क पर गिर जाता है। कई बार हाईवे बंद होने के मामले भी आ चुके हैं। वहीं दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं। बीते वर्षों में बरसात में हुए नुकसान को देखते हुए इस बार फोरलेन निर्माता कंपनी ने कमर कस ली है और टीम को अलर्ट कर दिया है।
पांच टीमों को अलग-अलग जगहों पर तैनात किया है। सनवारा टोल प्लाजा पर कंट्रोल रूम भी बनाया गया है। यहां पर हर सूचना पहुंचेगी। इसी के साथ हाईवे के किनारे लगे फोन भी आपात स्थिति के लिए जांचे जा चुके हैं।
जीआर इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट मैनेजर बलविंद्र सिंह ने बताया कि कर्मचारियों को निर्देश दिए जा चुके हैं। कंपनी ने बरसात से निपटने की तैयारियां कर ली हैं। इसके लिए बनाए प्लान के अनुसार ही टीमें तैनात कर दी हैं। इस बार बरसात में सड़क पर वाहनों के पहिये नहीं थमेंगे।