नौणी विवि में मछली पालन शुरू, तीन हजार बीज डाले
किसानों की आय बढ़ाने के लिए चार उन्नत प्रजातियों का होगा पालन
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। किसानों की आय बढ़ाने के लिए नौणी विवि ने खेतों में बने तालाबों में मछली पालन शुरू किया है। विश्वविद्यालय ने चार उन्नत प्रजातियों की मछलियों के तीन हजार बीज तालाबों में डाले हैं। विवि के कुलपति डॉ. परविंदर कौशल ने मुख्य परिसर के मॉडल फार्म में जल भंडारण तालाबों में इन मछलियों को डाला। इन मछलियों को हिमाचल प्रदेश राज्य मत्स्य विभाग के नालागढ़ प्रजनन फार्म से खरीदा गया था। इनमें हंगेरियन कार्प, मृगल, जयंती रोहू और कटला शामिल हैं। इस मौके पर कुलपति ने कहा कि भविष्य में पोल्ट्री और डक कल्चर को शामिल करके मछली आधारित एकीकृत कृषि प्रणाली मॉडल स्थापित करने की दिशा में कार्य करने की योजना बनाई जा रही है। विवि में मछली पालन को व्यापक बनाने और किसानों, विशेष रूप से राज्य के बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान करेगा। विश्वविद्यालय ने हिमाचल प्रदेश में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए तीन करोड़ रुपये के वैज्ञानिक हस्तक्षेप और क्षमता निर्माण पर एक परियोजना प्रस्ताव भी तैयार किया है। इसे राज्य सरकार के माध्यम से भारत सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत वित्तीय सहायता के लिए भेजा जाएगा। इस अवसर पर डॉ. एम के ब्रह्मी, ओएसडी, डॉ. के एस पंत, संयुक्त निदेशक, डॉ. रोहित बिष्ट, डॉ. केएल शर्मा, डॉ. दीपक सुम्ब्रिया सहित तकनीकी और फील्ड स्टाफ मौजूद रहे।
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नालागढ़ के फार्मो से लिया प्रशिक्षण
सहायक निदेशक डॉ. हमीर चंद ने मुख्य परिसर के खेतों का दौरा किया। मत्स्य पालन शुरू करने से पहले, डॉ. सोम नाथ, वरिष्ठ मत्स्य अधिकारी ने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक और प्रबंधकीय कर्मियों को वैज्ञानिक मछली पालन के विभिन्न पहलुओं से परिचित करवाने के लिए दो प्रशिक्षण प्रदान किए। नालागढ़ और देवली में मछली प्रजनन फार्मों का एक्सपोजर दौरा भी किया गया। इस अवसर पर डॉ. परविंदर कौशल ने कहा कि विश्वविद्यालय ने कृषि-बागवानी, वानिकी और डेयरी गतिविधियों के अलावा मत्स्य पालन भी शुरू किया है।