स्टॉक का इस्तेमाल नहीं कर पाया स्वास्थ्य विभाग, मार्च 2017 में बनी दवा को फरवरी 2018 तक करना था इस्तेमाल
मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में पड़ा है स्टॉक
राकेश शर्मा
सोलन।
पेयजल शुद्धता की सबसे ज्यादा जरूरत वाले जिले में क्लोरीन की दस हजार से ज्यादा टेबलेट एक्सपायर हो गईं हैं। स्वास्थ्य विभाग को एक साल के भीतर इनका इस्तेमाल करना था। इनका स्टॉक स्वास्थ्य विभाग सोलन के अधीन जुटाया था। दवाओं को फरवरी 2018 तक इस्तेमाल में लाया जा सकता था लेकिन स्वास्थ्य विभाग इस निर्धारित अवधि के दौरान इनका इस्तेमाल नहीं कर सका। इस वजह से दवाओं का यह पूरा स्टॉक बर्बाद हो गया।
स्वास्थ्य विभाग अब एक्सपायर हो चुकी इन दवाओं को नष्ट करने की बात कर रहा है। जिला के स्वास्थ्य केंद्रों में बांटने के लिए नया स्टॉक मंगवा लिया है। क्लोरीन टेबलेट का इस्तेमाल पानी की शुद्धता के लिए किया जाता है। एक टेबलेट करीब 20 लीटर पानी को दो घंटे में शुद्ध बना सकती है। टेबलेट को पीस कर पानी में मिलाया जाता है। स्वास्थ्य विभाग ने एक-एक हजार टेबलेट से भरे डिब्बे खरीदे थे। इनकी सप्लाई हिंद फार्मा भोपाल से विभाग को की गई है। डिब्बे पर उत्पादन की तारीख मार्च 2017 अंकित है जबकि इसे 12 माह के दरम्यान इस्तेमाल किया जाना था। फरवरी में एक्सपायर होने के बावजूद दो माह से अधिक समय गुजर जाने के बावजूद स्टॉक को नष्ट नहीं किया है। डिब्बों में भारी संख्या में टेबलेट मौजूद हैं। एक्सपायर हो चुका यह स्टॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में पड़ा है। लेकिन विभाग के आला अधिकारी इसकी जानकारी होने से भी अब इंकार कर रहे हैं।
ज्यादा जानकारी नहीं है : सीएमओ
मुख्य चिकित्सा अधिकारी आरके दरोच ने कहा कि क्लोरीन टेबलेट के एक्सपायर होने की उन्हें जानकारी नहीं है। यदि ऐसा कोई स्टॉक कार्यालय के स्टोर में पड़ा है तो उसे तत्काल नष्ट कर दिया जाएगा। क्लोरीन एक्सपायर कैसे हुई या इनका वितरण क्यों नहीं हो पाया, इसकी भी जांच करेंगे। जिला भर के लिए नया स्टॉक मंगवा लिया है। अब इसे चिकित्सा केंद्रों में वितरित किया जा रहा है।
सोलन में रहती है साफ पानी की जरूरत
जिला में पेयजल की जबरदस्त किल्लत रहती है। यहां गर्मियों से बरसात तक शहर के अलावा अन्य इलाकों में भी हफ्ते में एक ही दिन पानी नसीब होता है। ऐसे में लोग टंकियों के माध्यम से पानी को स्टोर करके लंबे समय तक रखते हैं। इस पानी को पीने लायक बनाए रखने के लिए क्लोरीन की जरूरत रहती है। लेकिन हैरानी की बात है कि इतनी जरूरत के बावजूद स्वास्थ्य विभाग क्लोरीन टेबलेट का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाया। न ही इस स्टॉक को फरवरी में एक्सपायर होने के बाद नष्ट किया।