जिला सोलन, कुनिहार और कंडाघाट क्षेत्र में फसल हो रही तबाह
1250 हेक्टेयर भूमि पर होता है 18512 मीट्रिक टन मिर्च का उत्पादन
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। भारी बारिश से जिले के अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की टमाटर और शिमला मिर्च की फसल खराब होने लग गई है। सबसे अधिक नुकसान शिमला मिर्च को हो रहा है।
आलम यह है कि शिमला मिर्च में सड़न रोग लग गया है। यह रोग रातोंरात में ही फसल को अपना ग्रास बना रही है। किसानों की माने तो इस बार शिमला मिर्च में पहले ही सूखने की बीमारी से तबाह हो चुकी है। अब सड़न रोग लग गया है। किसानों को अपनी फसल को बचाने के लिए चिंता सताने लग गई है।
जिले में प्रति वर्ष 1250 हेक्टेयर भूमि पर 18512 मीट्रिक टन शिमला मिर्च का उत्पादन किया जाता है। इस बार अधिकतर क्षेत्रों में शिमला मिर्च की फसल तबाह हो गई है। इस कारण इस बार शिमला मिर्च की मांग अधिक रहेगी। हालांकि अभी सब्जी मंडी में शिमला मिर्च का दाम भी बहुत कम है। यह 10 से 20 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रही है। इसके अलावा टमाटर में लगी सूंडी से किसान परेशान हैं। हालांकि सूंडी सूखे मौसम में फसलों को अपना ग्रास बनाती थी, लेकिन इस बार बारिश के बीच भी टमाटर को खराब कर रही है। किसान सन्नी, गिरिश, भूपेंद्र, सुरेश, गणेश शर्मा, सुशील शर्मा, देवदत्त समेत अन्य किसानों ने बताया कि शिमला मिर्च में जले हुए जख्म की तरह दाग पड़ रहा है। जबकि टमाटर में काला दाग की बिमारी लगनी शुरू हो गई है। हालांकि टमाटर में यह रोग अधिक नहीं है, लेकिन शिमला मिर्च इसकी चपेट में आ गई है। शुरुआत में शिमला मिर्च में छोटा दाग पड़ता है। जोकि रातों रात में पूरी मिर्च को खराब कर देता है। हालांकि जब यह दाग लगना शुरू होता है। उस समय मिर्च कठोर बनी रहती है। जैसे ही यह पूरी तरह से फैल जाता तो मिर्च को भी कमजोर कर पिलपिला कर देती है।
पानी की करें उचित निकासी
जिला उपनिदेशक कृषि विभाग सोलन डॉ. डीपी गौतम ने बताया कि बरसात में खेतों में पानी खड़ा रहता है, जिस कारण फसल में सड़न रोग लग जाता है। उन्होंने किसानों को राय दी कि वह खेतों में पानी खड़ा न रहने दें, खेतों से पानी की उचित निकासी बनाए। वहीं टमाटर के खेतों में जड़ से लेकर करीब 15 से 20 सेमी की ऊंचाई तक के पत्तों को काट देना चाहिए। इसके अलावा किसान रिडोमिल एमजेड फफूंदनाशी और इंडोफिल एम 45 प्लस सैंडोविट 40 ग्राम 15 मिली पानी के साथ समय-समय पर साफ मौसम में 7-10 दिन बाद छिड़काव करें।