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शहर में फैला मौसमी वायरल, 70 फीसदी बच्चे चपेट में आए

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संवाद न्यूज एजेंसी
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सोलन। मौसम में बदलाव और कोरोना के दो साल बाद घरों से निकलने के बाद अब बच्चे वायरल की चपेट में आ रहे हैं। अस्पताल में आने वाले 70 फीसदी बच्चों में मौसमी वायरल के चलते बुखार और जुकाम निकल रहा है।
अस्पतालों में बच्चों की ओपीडी भी बढ़ती जा रही है। क्षेत्रीय अस्पताल में रोजाना 150 तक ओपीडी हो रही है। करीब 110 से 115 बच्चे वायरल से ग्रस्त पहुंच रहे हैं। बच्चों में ज्यादातर खांसी, जुकाम, बुखार, गला दर्द और पेट दर्द की शिकायतें आ रही है। बच्चों का वायरल ठीक होने में एक सप्ताह से अधिक समय लग रहा है। बच्चों में रैंडम कोविड की जांच भी की जा रही है। खास बात यह है कि रैंडम सैंपलों की रिपोर्ट निगेटिव आ रही है।
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कोरोना काल के लंबे समय के बाद बच्चे घरों से निकले हैं। कोरोना के मामले घटने से बच्चों ने मास्क लगाना भी छोड़ दिया है। मौसम में हो रहे लगातार बदलाव से बच्चों में वायरल बढ़ा है। तीन साल से 12 साल के बच्चों में वायरल की शिकायत आ रही है।
क्षेत्रीय अस्पताल समेत अन्य अस्पतालों में शिशु रोग ओपीडी में लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। वीरवार को क्षेत्रीय अस्पताल में 145 की ओपीडी रही। ओपीडी में 110 बच्चों को वायरल से बचाव का उपचार दिया।
क्षेत्रीय अस्पताल सोलन के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि ने बताया कि इन दिनों बच्चे मौसमी वायरल की चपेट में आ रहे हैं। कोरोना के बाद बच्चों केे घरों से बिना मास्क और अन्य सावधानी निकलने से ऐसा हो रहा है। उन्होंने बताया कि कोविड के बीच दो सालों से वायरल कम हो गया था लेकिन अब फिर बढ़ गया है।
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मास्क पहने और स्वच्छ भोजन खाएं
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि ने बताया कि बच्चे मास्क जरूर पहनें। स्कूल से घर लौटने के बाद एकदम ठंडा पानी न पीयें। आइसक्रीम और फ्रिज का पानी न पीयें। ताजी सब्जियों का सेवन करें और हाथ धोते रहें। उन्होंने कहा कि बच्चों को विटामिन सी खिलाएं। वायरल की चपेट में आने पर तुरंत चिकित्सक की सलाह लें। बिना चिकित्सक की सलाह बच्चों को दवाइयां न दें।
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