प्रदेश में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को नशा निवारण केंद्र चलाने, नशीले पदार्थों के लिए प्रति जागरूक करने का जिम्मा दिया गया है। सरकार की ओर से इन कार्यों के लिए बजट भी जारी किया जाता है। कई क्षेत्रों में विभागीय अधिकारी नशे की रोकथाम के लिए बेहतर कार्य कर रहे हैं, लेकिन बीते दिनों शिमला जिला के एक तहसील कल्याण अधिकारी की चिट्टे के मामले में संलिप्तता सामने आने से विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गए हैं। समाज कल्याण का जिम्मा संभालने वाले अधिकारियों के ही नशे के मामलों में फंसने से उच्च अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है। इसके चलते निदेशक किरण भड़ाना ने इन कार्यों से जुड़े सभी अधिकारियों की काउंसलिंग करने का फैसला लिया है।
इन अधिकारियों को पत्र जारी कर 24 फरवरी को शिमला बुलाया गया है। इस बैठक के दौरान अधिकारियों को उनके दायित्वों की याद दिलाई जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। निदेशक ने बताया कि अधिकारियों पर नशे की रोकथाम के लिए बड़ी जिम्मेवारी है। अधिकारी ही अगर पकड़े जाएंगे तो समाज में गलत संदेश जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले को लेकर गंभीर है। लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।