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रासा नृत्य, पहाड़ी नाटियां और बुढेचू नाच रहे आकर्षण

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सिरमौर के नौहराधार क्षेत्र में बूढ़ी दिवाली पर आयोजित कार्यक्रम में प्रस्तुति देते कलाकार। - फोटो : NAHAN
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नौहराधार (सिरमौर)। गिरिपार इलाके के कई गांवों में बूढ़ी दीवाली के उपलक्ष्य पर शनिवार रात्रि सांस्कृतिक कार्यक्रमों की खूब धूम रही। तापमान में भारी गिरावट के बावजूद भी ठंड की परवाह किए बगैर लोगों ने बूढ़ी दिवाली पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बढ़ चढ़कर भाग लिया। वहीं मेहमान नवाजी करने पहुंचे लोगों ने सिरमौरी व्यंजन असकली, पटांडे, सिड़कू, शाकुई के चटकारे लिए।
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इस अवसर पर चोकर, भराड़ी और चाढना में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। इन रात्रि कार्यक्रमों में जहां हिमाचली नामी कलाकारों ने धूम मचाई, वहीं लोक कलाकारों नेरासा, बुड़ियाच, हारुल, बिरसु जैसे पारंपरिक लोक गीतों में समूह बनाकर नृत्य किया और लोगों का भरपूर मनोरंजन करवाया।
लोक कलाकारों ने आकर्षक पारंपरिक वेशभूषा में हाथ में ढोल, नगाड़ा, करनाल, हुलक से प्रस्तुतियां दीं जिसका लोगों ने खूब लुत्फ उठाया। चोकर गांव में हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम में कपिल शर्मा और धर्मपाल ने पहाड़ी गीतों से खूब समा बांधा। कपिल शर्मा ने किले जाणी कुदायणों देवा विजट महिमा से कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद एक से बढ़कर पहाड़ी गीत गाकर पंडाल में बैठे लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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उधर, चाढना में इंडियन आइडल फेम दीपक चौहान ने शिरगुल महिमा से कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने शूण झूरिये शुन जियो री बातों, यार नी मिलना दिलदार गाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सुमन सोनी ने भी प्रस्तुति दी। भराड़ी में पहाड़ी कलाकार विपिन खदराई व सुलेखा बरसांटा ने कार्यक्रम प्रस्तुत कर खूब वाहवाही लूटी। गौरतलब है कि सिरमौर जिला का गिरिपार क्षेत्र सदियों पुरानी लोक संस्कृति और परंपराओं को संजोए रखने के लिए मशहूर है। पहले दिवाली अब शनिवार से तीन दिन तक बूढ़ी दिवाली मनाई जा रही है।
शनिवार अमावस्या को मशाल यात्रा से बूढ़ी दीवाली पर्व आरंभ हो गया है। करीब अढ़ाई लाख की आबादी वाले गिरिपार के नौहराधार, शिलाई, आंजभौज, संगड़ाह, कमरउ इलाके में यह पर्व मनाया जाता है।
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