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रक्षा बंधन पर उड़े पतंग, छोड़ जाते हैं मौत का सामान

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नाहन बाजार में बिक्री के लिए रखी गई चाईनीज डोर व पंतग। - फोटो : NAHAN
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नाहन (सिरमौर)। पतंगबाजी का शौक पर्यावरण के लिए घातक सिद्ध हो रहा है। नाहन में रक्षाबंधन पर पतंग उड़ाने की रिवायत है जो रियासतकालीन समय से चली आ रही है। हालांकि पतंगबाजी में कमी आई है लेकिन रक्षाबंधन पर इसकी रस्म जरूर निभाई जाती है। कुछ सालों से युवा चाइनीज डोर का इस्तेमाल कर रहे हैं।
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हालांकि इस डोर की बिक्री पर प्रतिबंध लगा हुआ है लेकिन प्रशासन इसकी बिक्री रुकवाने में नाकाम रहा है जिससे हर वर्ष रक्षाबंधन पर पतंगबाजी के लिए इस्तेमाल में लाई जाने वाली चाइनीज डोर मौत का सामान छोड़ जाती है। जो इंसानों और पक्षियों के लिए परेशानी का सबब बन जाती है। कुछ ही दिनों के बाद रक्षाबंधन पर फिर पतंगबाजी होनी है। ऐसे में शहर के बुद्धिजीवी चिंतित नजर आ रहे हैं।
इस संदर्भ में जब ‘अमर उजाला’ ने उनसे बात की तो उन्होंने चाइनीज डोर के दुष्प्रभाव गिनाते हुए इसका इस्तेमाल न करने की बात कही।
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क्या कहते हैं शहर के बुद्धिजीवी
1. बीएसएनएल की जेटीओ प्रिया कश्यप ने कहा कि चाइनीज डोर मानव जाति और पक्षियों के लिए घातक है। इससे घायल कई पक्षियों ने मेरे सामने दम तोड़ा है। युवाओं को भी देशहित और पर्यावरण हित में इससे परहेज करना चाहिए।
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2. शिक्षक लायक राम भारद्वाज ने कहा कि पतंगबाजी के बाद घरों की छतों, तारों, सड़कों, पेड़ों में चाइनीज डोर रह जाती है जिसमें उलझकर दोपहिया चालक और लोग चोटिल हो रहे हैं। देश हित में युवाओं को इसका उपयोग नहीं करना चाहिए।
3. कवि श्रीकांत अकेला ने कहा कि यह डोर बहुत मजबूत है, टूटती नहीं। वृक्षों में लटकी चाइनीज डोर से उलझ कर पक्षी दम तोड़ रहे हैं। कई पक्षियों को इस डोर में दम तोड़ता देख चुका हूं। युवाओं को चाहिए कि वह साधारण डोर ही इस्तेमाल करें।
4. शिक्षिका अनिशा गौतम ने कहा कि प्रतिबंध लगा होने के बाद भी नाहन में चाइनीज डोर की बिक्री हो रही है, जो दुखद है, पतंगबाजी के बाद यहां-वहां लटकी डोर महीनों इंसानों को घायल करेगी तथा पक्षियों की जान लेगी। इसके इस्तेमाल पर ईमानदारी से रोक लगनी चाहिए।
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