ग्राउंड रिपोर्ट
-महंगे कीटनाशकों के छिड़काव के बावजूद कीड़े पर नहीं हो रहा कोई असर
भजन चौधरी
धौलाकुआं (सिरमौर)। सिरमौर जिले के प्रमुख मैदानी कृषि क्षेत्रों धौलाकुआं और पांवटा साहिब में इन दिनों मक्के की फसल पर एक अज्ञात और बेहद खतरनाक बीमारी का साया मंडरा रहा है। क्षेत्र के असिंचित (बारिश पर निर्भर) इलाकों में सफेद रंग के एक अजीब कीड़े के प्रकोप के कारण सैकड़ों बीघा भूमि पर मक्के की हरी-भरी फसल खेतों में ही सूखकर बर्बाद हो रही है। हैरान करने वाली बात यह है कि किसानों की ओर से महंगे कीटनाशकों के छिड़काव के बावजूद इस कीड़े पर कोई असर नहीं हो रहा है। इससे अन्नदाताओं की रातों की नींद उड़ गई है।
धौलाकुआं और पांवटा के असिंचित क्षेत्रों के किसान हर साल मक्के की बंपर पैदावार लेकर अच्छी आमदनी कमाते हैं। करीब एक महीना पहले जब सीजन की पहली बारिश हुई थी, तो किसानों ने मौसम को अनुकूल मानते हुए समय पर मक्के की बिजाई कर दी थी लेकिन उसके बाद से क्षेत्र में मानसून और बारिश का नामोनिशान नहीं है। दिन-ब-दिन तापमान में भारी उछाल दर्ज किया जा रहा है। इस भीषण गर्मी और सूखे के मिजाज ने फसलों को कमजोर कर दिया और इसी बीच इस अज्ञात महामारी ने पैर पसार लिए।
वर्तमान में मक्के के पौधे लगभग एक-एक फुट के हो चुके हैं, लेकिन खेतों में खड़ी फसल अचानक पीली और सूखी नजर आने लगी है। प्रभावित किसानों ने जब पौधों की बारीकी से जांच की, तो एक चौंकाने वाला मामला सामने आया। पौधे की गोभ (ऊपरी कोमल हिस्सा जहां से नई पत्तियां निकलती हैं) के भीतर सफेद रंग का एक कीड़ा छिपा हुआ है। यह कीड़ा पौधे को अंदर ही अंदर पूरी तरह काट रहा है, जिससे मुख्य तना सूख जाता है और पूरा पौधा दम तोड़ देता है।
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पहली बार दिखा ऐसा रोग, खाली हो रहे खेत
किसानों का कहना है कि इससे पहले उन्होंने फसलों में ‘फॉल्स आर्मीवर्म’ (सुंडी रोग) का प्रकोप तो देखा था, लेकिन सफेद रंग के कीड़े का ऐसा जानलेवा हमला पहली बार अनुभव किया जा रहा है। इस रोग की शुरुआत सबसे पहले जामनीवाला पंचायत के खारा गांव से हुई थी। खारा गांव के स्थानीय निवासी और किसान राजा राम, शंकर, सुमेर चंद और अमर सिंह ने अत्यंत चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि यह रोग इतनी तीव्र गति से फैल रहा है कि देखते ही देखते हमारे लहलहाते खेत खाली हो रहे हैं। हमने जेब से पैसे खर्च करके बाजार से महंगी कीटनाशक दवाइयां लाकर छिड़काव भी किया, लेकिन दवा का इस कीड़े पर एक प्रतिशत भी असर नहीं हुआ। हमारी मेहनत और लागत दोनों डूबने की कगार पर हैं।
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इन गांवों पर मंडराया संकट
खारा गांव के अलावा किशनकोट, ज्वालापुर और काहनुवाला-खोडोवाला ऐसे क्षेत्र हैं जहां मक्के की सबसे बेहतरीन पैदावार होती है, लेकिन जिस रफ्तार से यह सफेद कीड़ा एक खेत से दूसरे खेत में फैल रहा है, उससे पूरे क्षेत्र में मक्के का उत्पादन शून्य होने और किसानों को लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान होने की पूरी संभावना बन गई है।
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किसान विभाग को दें सूचना
इस गंभीर संकट को लेकर जब कृषि विभाग के एसएमएस डॉ. मनजीत सिंह से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि विभाग के पास अभी तक इस विशिष्ट रोग या फसल खराबे की कोई लिखित या औपचारिक सूचना नहीं पहुंची है। डॉ. मनजीत सिंह ने क्षेत्र के किसानों से अपील करते हुए कहा जिन भी क्षेत्रों में मक्के की फसल में यह सफेद कीड़ा दिखाई दे रहा है, वहां के किसान बिना देरी किए तुरंत कृषि विभाग के नजदीकी कार्यालय में इसकी सूचना दें। किसान प्रभावित पौधों के सैंपल भी ला सकते हैं, ताकि विभाग के वैज्ञानिक तुरंत खेतों का दौरा कर रोग की सही पहचान कर सकें और समय रहते इसके खात्मे के लिए सही और असरदार दवा की सिफारिश की जा सके।-
संवाद
विकास खंड पांवटा के खारा गांव में मक्की की फसल को पहुंचा नुकसान। संवाद