सीएचसी नौहराधार में दाखिल व उपचार के लिए इंतजार में बैठे मरीज। संवाद
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नौहराधार (सिरमौर)। जिला सिरमौर में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। कहीं स्टाफ की दरकार है तो कहीं मरीजों को दाखिल करने के लिए बिस्तर की भारी कमी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौहराधार में स्थिति इससे थोड़ी विपरीत है। यहां पर उपचार के लिए स्टाफ तो है लेकिन मरीजों को दाखिल करने के लिए बिस्तर न के बराबर हैं। ऐसे में गंभीर रूप से बीमार लोगों को नाहन व सोलन रेफर करना पड़ रहा है।
नौहराधार सीएचसी में मरीजों को दाखिल करने के लिए मात्र दो बिस्तरों की व्यवस्था है। जबकि यहां पर चिकित्सकों के चार पद स्वीकृत हैं। इनमें तीन सेवाएं दे रहे हैं। हैरानी की बात है कि सरकार और विभाग ने यहां चिकित्सकों के पद तो सृजित किए हैं लेकिन मरीजों को दाखिल करने के लिए बिस्तर की व्यवस्था नहीं की है। ऐसे में हजारों की आबादी वाले इस इलाके के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं से महरूम होना पड़ रहा है।
सीएचसी में सामान्य तौर पर 100 के करीब ओपीडी होती है। इन दिनों वायरल फीवर और संक्रमण के चलते ओपीडी में इजाफा हो रहा है। रोजाना करीब 130 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। केंद्र में केवल दो बिस्तर हैं ऐसे में चिकित्सकों को मरीजों को दाखिल करने में दिक्कतें हो रही हैं। कई बार तो एक बिस्तर पर दो-दो मरीज दाखिल किए जा रहे हैं।
हालांकि, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के नए भवन का कार्य चल रहा है। यह कब पूरा होगा कहा नहीं जा सकता लेकिन तब तक यहां उपचार करवाने के लिए आने वाले लोगों को परेशानियों का निरंतर सामना करना पड़ेगा। इसके अलावा सीएचसी में अन्य स्टाफ के पद रिक्त पड़े हैं। स्टाफ नर्स के चार में से तीन, प्रयोगशाला तकनीशियन के दो में से एक और स्वास्थ्य सुपरवाइजर का एक पद रिक्त चल रहा है। इसके अलावा एक्सरे और अल्ट्रासाउंड जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं है।
बता दें कि इस अस्पताल को सात साल पहले सीएचसी का दर्जा तो मिला लेकिन सुविधाएं जस की तस रखीं। सीएचसी में तैनात डॉ. चारू बहल ने बताया कि प्रतिदिन वायरल फीवर के 50 से 60 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें ज्यादातर स्कूली छात्र हैं। कुछ को उपचार कर घर भेजा गया, जबकि गंभीर रूप से बीमार को दूसरे अस्पतालों को रेफर किया गया है। उन्होंने बताया कि सीएचसी में केवल दो ही बिस्तर हैं।