सचित्र-(फोटो सहित)
पंकज तन्हा
नाहन (सिरमौर)। दिवाली पर्व पर एक बार फिर से आतिशबाजी से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण को लेकर बहस तेज हो गई है। उच्चतम न्यायालय इस बारे में देश भर में आतिशबाजी पर रोक लगाने की बात कह चुका है। हालांकि बाजार में इको फ्रेंडली पटाखे (ग्रीन पटाखे) भी आ चुके हैं, लेकिन लोग इनको कम ही खरीद रहे हैं। ऐसे में पर्यावरण को लेकर हुई तेज बहस के बीच लोगों से इस बारे में वार्तालाप करके उनका मत जानने का प्रयास किया गया।
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1. हरित दिवाली मनाने पर दें जोर
नाहन के अमरपुर निवासी मेघना चौहान ने कहा कि लोगों को हरित दिवाली मनाने पर जोर देना चाहिए। हरित दिवाली, स्वस्थ दिवाली बेहतर है। फिर भी यदि लोग आतिशबाजी करना चाहें तो उन्हें घरों-दुकानों से दूर खुले मैदान में आतिशबाजी करनी चाहिए।
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2. दिवाली रोशनी का पर्व, कानफोड़ू पटाखों की जरूरत नहीं
ददाहू की नेहा कालिया ने कहा कि दिवाली दीयों और रोशनी का पर्व है। इसके लिए कानफोड़ पटाखों की जरूरत ही नहीं है। दिवाली के दिन करोड़ों रुपये इसमें बर्बाद हो जाते हैं। प्रदूषण से लोगों को भी बीमारियां लग जाती हैं। इंसान और जानवर सभी परेशान रहते हैं। हरित दिवाली मनाने पर जोर देना चाहिए।
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3. गरीब के घर दीया जले न कि फेफड़े
टीजीटी यूनियन खंड ददाहू के अध्यक्ष नरेश चौहान ने कहा कि स्वच्छ हवा में सांस लेना सबका संवैधानिक अधिकार है। प्रदूषण मुक्त हवा के लिए सभी को सहयोग देना चाहिए। दिवाली ऐसे मनाए जिसमें गरीब के घर भी दीया जले न कि लोगों के फेफड़े।
4. पटाखों की बजाए तैलीय दीपकों का करें इस्तेमाल
समाजसेवी दलीप सिंह वर्मा ने कहा कि पटाखों से वायु में कणिका तत्व में अत्यधिक वृद्धि हो जाती है। इससे बुजुर्गों व बच्चों को सांस लेने में दिक्कत होती है। लोगों को दिवाली की खुशी परंपरागत तैलीय दीपकों का इस्तेमाल कर मनानी चाहिए। पटाखों से दूर रहना चाहिए।
संवाद
मेघना चौहान
मेघना चौहान
मेघना चौहान