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पांवटा में छठ पर्व पर डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर की आराधना

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यमुना नदी किनारे छठ पर्व पर डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर की आराधना करते प्रवासी। - फोटो : NAHAN
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पांवटा साहिब (सिरमौर)। पूर्वी भारत के प्रमुख त्योहारों में प्रमुख छठ पर्व सिरमौर जिले के पांवटा साहिब में धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान यमुना, गिरि और बाता नदी के किनारे छठ पूजा की। लोक आस्था के छठ पर्व पर डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर आराधना की गई। यमुनाघाट पांवटा में विशेष कर शाम ढलने के दौरान श्रद्घालुओं का खूब तांता लगा रहा।
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पार्षद पांवटा नगर परिषद मधुकर डोगरी, बिहार एवं झारखंड निवासी परमदेव, शिव सिंह, अंजना, मदन सिंह, गीता देवी, प्रीति, विवेक, गजेंद्र सिंह एवं प्रेम नाथ ने बताया कि आस्था का महापर्व छठ की 8 नवंबर से ही शुरूआत हो जाती है। यह त्योहार मुख्य तौर पर बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रमुख रुप से मनाया जाता है।
सिरमौर में इन प्रांतों के सैकड़ों प्रवासी परिवार रहते हैं, जो निजी व्यवसाय, नौकरीपेशा और औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत हैं। इस लोक आस्था के पर्व पर छठ व्रती उगते और डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर उनकी आराधना की जाती हैं। यह त्योहार सूर्य षष्ठी व्रत भी कहलाता है। इस कारण इसके छठ भी कहा जाता है। इस व्रत को साल में दो बार चैत्र और दूसरी बार कार्तिक मास में मनाया जाता है। कार्तिक मास में किए जाने वाले छठ की अधिक मान्यता है। विगत 8 नवंबर को नहाय-खाय से पर्व शुरू होता है।
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मंगलवार को खरना, बुधवार को डूबते सूर्य को अर्घ्य और वीरवार को सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। बुधवार देर शाम यमुना, गिरि एवं बाता नदी में पूजा अर्चना के लिए भारी भीड़ जुटी रही। महिलाओं ने सूर्य भगवान की पूजा करते हुए जल चढ़ाया। भगवान सूर्य के जन्मोत्सव का त्योहार छठ पर्व पांवटा साहिब में भी पूर्वी भारत की ही तरह परंपरागत तरीके से मनाया गया।
उन्होंने बताया कि छठ पूजा में बांस की बनी हुए बड़ी-बड़ी टोकरियां, पीतल या बांस का सूप, दूध, जल, लौटा, शाली, गन्ना, मौसमी फल, पान, सुथना, सुपारी, मिठाई, दीपक पूजन को रखा जाता है। सूर्य देव को छठ के दिन मौसम में मिलने वाली सभी फल और सब्जी अर्पण की गई। पांवटा के यमुनाघाट और बातापुल के समीप आयोजित कार्यक्रम के दौरान स्थानीय लोगों ने भी धार्मिक पर्व पर पूर्वी भारत के लोगों के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी छठ पर्व की बधाई दी। वीरवार को सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ छठ पर्व का समापन होगा।
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