वन भूमि-सड़क विवाद : हिमाचल के कई क्षेत्रों में 26
संपत्तियां, 1.77 करोड़ से अधिक के लेनदेन की जांच
- एसवी एंड एसीबी की स्टेटस रिपोर्ट में खुलासा, 2010 से 2024 के बीच मुख्य आरोपी ने चंडीगढ़ के प्रॉपर्टी डीलरों की मदद से खरीदी संपत्तियां
- सरकारी सड़क के निजी इस्तेमाल का आरोप, सैटेलाइट इमेजरी और एरियल सर्वे से खंगाला जा रहा पूरा नेटवर्क
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। जिले के राजगढ़ में बहुचर्चित वन भूमि-सड़क विवाद की जांच में स्टेट विजिलेंस एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (एसवी एंड एसीबी) को कई अहम सुराग मिले हैं। विजिलेंस की स्टेटस रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मुख्य आरोपी जसवंत सिंह ने वर्ष 2010 से 2024 के बीच हिमाचल के विभिन्न क्षेत्रों में 26 संपत्तियां खरीदीं। इनमें सिरमौर के चापला, मोहारी, धर्मपुर और डंगयारी सहित प्रदेश के अन्य स्थानों की संपत्तियां शामिल हैं। एजेंसी का कहना है कि इन संपत्तियों में कथित बेनामी निवेश, धन के स्रोत और वास्तविक लाभार्थियों की जांच के बाद कई और नई परतें खुलेंगी।
रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2006 में राजगढ़ क्षेत्र में खरीदी गई करीब 30 बीघा निजी भूमि तक सरकारी धन से लिंक रोड बनाई गई, इसमें आरोपी जसवंत सिंह को प्रत्यक्ष लाभ मिलने का दावा किया गया है। जांच में जसवंत सिंह और चंडीगढ़ निवासी प्रॉपर्टी डीलर यशपाल अग्रवाल के बीच बड़े वित्तीय लेनदेन भी सामने आए हैं। इसमें वर्ष 2015 से 2026 के बीच यशपाल अग्रवाल और रक्षा अग्रवाल के संयुक्त खाते से 37.84 लाख, रक्षा अग्रवाल के खाते से 35 लाख तथा वर्ष 2007 में यशपाल अग्रवाल की ओर से 4 लाख जसवंत सिंह को भेजे गए। वहीं जसवंत सिंह ने यशपाल अग्रवाल के खाते में 1.0095 करोड़ ट्रांसफर किए। एजेंसी इन लेनदेन के स्रोत, उद्देश्य और संपत्तियों के वास्तविक स्वामित्व की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
विजिलेंस के अनुसार जसवंत सिंह के आयकर रिटर्न और खरीदी गई संपत्तियों के मूल्य में भी अंतर पाया गया है। इसके आधार पर मनी ट्रेल, बैंक रिकॉर्ड और कथित बेनामी निवेश की जांच तेज कर दी गई है। सैटेलाइट इमेजरी, एरियल सर्वे, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच तथा विभिन्न विभागों से जुटाए जा रहे दस्तावेजों के जरिए पूरे नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है। वहीं, नाहन अदालत से यशपाल अग्रवाल और मनीष अग्रवाल की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज होने के बाद विजिलेंस ने दावा है कि आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की जाएगी।
यह है पूरा मामला
मामला 3 मार्च 2026 को एसवी एंड एसीबी थाना नाहन में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। आरोप है कि जूनियो–कुल्थीधार–बसोटी–दुधम लिंक रोड के निर्माण में स्वीकृति 0.50 हेक्टेयर वन भूमि से अधिक क्षेत्र का उपयोग कर पार्किंग, रिटेनिंग वॉल और अतिरिक्त निर्माण किए गए तथा संरक्षित वन क्षेत्र एवं शामलात भूमि पर अतिक्रमण हुआ। मामले में धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र, अतिक्रमण तथा भारतीय वन अधिनियम की धाराओं के तहत जांच जारी है। वन भूमि के उपयोग, पेड़ों की कटाई और संबंधित विभागों के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच के दायरे में है।