शिपकी ला के रास्ते छह साल बाद तिब्बत में कारोबार करने गए 16 भारतीय व्यापारी 72 घंटे में वापस लौट आए हैं। इन व्यापारियों ने वहां गुड़, दालें, कारपेट, बिस्कुट, तेल, चाय को निर्यात किया, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 2.22 लाख रुपये थी। इनके बदले व्यापारी तिब्बत से चादरें, जूत्ते, घड़ियां और चाइना क्ले को लेकर आए हैं। सोमवार को तिब्बत गए 16 व्यापारी शिपकी ला के पास वास्तविक नियंत्रण सीमा के पास अपने घोड़े, खच्चरों के साथ वापस पहुंचे। शिपकी ला सीमा पर आयात किया सामान वाहनों में लोड किया और छुप्पन ट्रेड मार्ट ले गए, जहां कस्टम विभाग ने सामान की जांच की। शिपकी ला के रास्ते तिब्बत में कारोबार करने वाले किन्नौर इंडो-चाइना व्यापार संघ के अध्यक्ष हिशे नेगी के अनुसार सभी व्यापारी आरामदायक कारोबार करके वापस आए हैं। किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई। व्यापारियों का अगला जत्था अब बुधवार को तिब्बत रवाना होगा। नियंत्रण रेखा से करीब पांच किलोमीटर दूरी पर चाइना की ओर से भारतीय व्यापारियों के लिए ट्रेड मार्ट बनाया गया है, जहां वह चाइना-तिब्बत के व्यापारियों के साथ सामान का आदान-प्रदान कर रहे हैं। सामान का आदान-प्रदान करने के लिए सरकार ने सूची बनाई है। व्यापारी 36 वस्तुओं का निर्यात और 20 वस्तुओं का आयात कर सकते हैं। बता दें कि शनिवार को छह साल बाद शिपकी ला के रास्ते तिब्बत से कारोबार हुआ है। शनिवार को राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने 16 व्यापारियों को नव निर्मित छुप्पन ट्रेड मार्ट से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। तिब्बत जाने वाले व्यापारियों को 72 घंटे में लौटना जरूरी है, जिसके तहत वह सोमवार दोपहर को लौट आए।