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शांति विहार के मकानों में दरारें: अनिरुद्ध बोले- फोरलेन निर्माण कार्य में स्थानीय लोगों के हितों की नहीं होगी

Tue, 22 Sep 2026 07:59 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

कैथलीघाट-ढली फोरलेन की भट्टाकुफर से चलौंठी तक बन रही ट्विन टनल के एलाइनमेंट में आने वाले नगर निगम के शांति विहार वार्ड के आठ से दस मकानों में दरारें आने के मामले को लेकर मंगलवार को भवन मालिकों और स्थानीय लोगों का प्रतिनिधिमंडल सचिवालय में पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह से कार्यालय में मिला।
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मंत्री अनिरुद्ध सिंह से मिला भवन मालिकों और स्थानीय लोगों का प्रतिनिधिमंडल। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कैथलीघाट-ढली फोरलेन की भट्टाकुफर से चलौंठी तक बन रही ट्विन टनल के एलाइनमेंट में आने वाले नगर निगम के शांति विहार वार्ड के आठ से दस मकानों में दरारें आने के मामले को लेकर मंगलवार को भवन मालिकों और स्थानीय लोगों का प्रतिनिधिमंडल सचिवालय में पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह से कार्यालय में मिला। इन दिनों उनके पास लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार भी है। प्रभावितों की बात सुनने के बाद पंचायती राज मंत्री ने कहा कि वे इस गंभीर मामले को लेकर मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक करेंगे। पर्यावरणविदों, भूवैज्ञानिकों और अन्य अधिकारियों की एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन कर इसकी जांच करवाई जाएगी।

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उन्होंने कहा कि वे किसी सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश या जज की अध्यक्षता में कमेटी बनाकर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाने का सुझाव दिया जाएगा, जिससे भवनों को हुए नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह से मुलाकात के दौरान पार्षद विनीत शर्मा, पूर्व पार्षद राजेंद्र चौहान, भट्टाकुफर के पार्षद नरेंद्र ठाकुर, राजेंद्र चौहान, विकास वर्मा, सुनी चौहान, गोविंद चतरांटा, अंशुल चौहान सहित अन्य भवन मालिकों ने मकानों में आ रही दरारों की समस्या को उठाया और इसके स्थायी समाधान की मांग की। इन लोगों ने मांग की कि आईआईटी की विशेष टीम की जांच पूरी होने और भवनों के सुरक्षित होने का प्रमाण मिलने, टनल के एलाइनमेंट में आने वाले भवनों को टनल की खुदाई से कोई फर्क पड़ेगा या नहीं, इसकी विस्तृत रिपोर्ट आने और भवनों की सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने के बाद ही निर्माण की अनुमति दिए जाने की मांग प्रमुखता से की। 

पार्षद विनीत और मकान मालिक अंशुल चौहान ने कहा कि टनल की जद में आने वाले सभी मकानों की बाकायदा मार्किंग की जाए, और इसके बाद भवन मालिकों की सहमति मिलने पर ही काम शुरू करने की एनएचएआई और निर्माण कंपनी को अनुमति दी जाए। भवन मालिकों की सभी मांगों को सुनने के बाद पंचायती राज मंत्री ने कहा कि फोरलेन टनल निर्माण से प्रभावित इलाकों के लोगों के हितों की रक्षा करने को लेकर सरकार पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने कहा कि टनल निर्माण के कारण घरों में दरारें आने से बड़ा खतरा पैदा हो गया है। संजौली, भट्टाकुफर और ढली क्षेत्रों में टनल का निर्माण कार्य ही इसका मुख्य कारण है। कैबिनेट मंत्री ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में निम्न स्तर का काम किया जा रहा है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारी हिमाचल के हितों की अनदेखी कर केवल कंपनियों के हितों को देख रही है।
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मंत्री ने कहा कि उपायुक्त ने स्थिति का जायजा लेने के बाद फिलहाल निर्माण कार्य के लिए दी गई अनुमति को वापस लेकर काम रोकने के आदेश जारी कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के साथ इस मामले को लेकर उच्चस्तरीय बैठक करेंगे। इसमें पर्यावरणविदों, भूवैज्ञानिकों और अन्य अधिकारियों को शामिल करके एक हाई पावर कमेटी का गठन करने पर फैसला होगा। वे सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश या जज की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने का सुझाव देंगे, जिससे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जा सके। पार्षद विनीत शर्मा ने कहा कि प्रभावित भवन मालिक पंचायती राज मंत्री की अगुवाई में बुधवार को मुख्यमंत्री से समय लेकर मुलाकात कर पूरे मामले से अवगत करवाएंगे, और भवन मालिकों के हितों की रक्षा और भवनों की सुरक्षा की मांग करेंगे।
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