बगीचों में कई पेड़ों से फल जमीन में गिरे, टहनियां भी टूटीं
बागवानों की सालभर की मेहनत पर फिरा पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। रामपुर उपमंडल में अंधड़ ने फिर प्लम की फसल पर कहर बरपाया है। अंधड़ से 30 फीसदी फसल को नुकसान पहुंचा है। वीरवार देर शाम को अंधड़ के साथ बारिश हुई। इस दौरान प्लम के पेड़ों से फल जमीन पर गिर गए और टहनियां भी टूट गईं। करीब दस दिन बाद प्लम का सीजन शुरू होने वाला है। उससे पहले अंधड़ ने बागवानों की सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। रामपुर के प्लम प्रदेश समेत देश के विभिन्न मंडियों में पहुंचते हैं। इन दिनों पेड़ पर फल आ गए हैं और बागवान सीजन की तैयारियां कर रहे हैं। हर साल मई, जून में प्लम का सीजन चलता है, लेकिन इस बार मई में भी बारिश और अंधड़ ने बागवानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। अप्रैल में भी अंधड़ और बारिश से बागवानों की फसल प्रभावित हुई थी। इस बार बागवानों को प्लम की फसल की बेहतर उत्पादन की उम्मीद है, लेकिन प्लम के सीजन के बीच अंधड़ और बारिश का कहर रहा, तो भारी नुकसान होने की आशंका है।
हर वर्ष मौसम की मार किसानों-बागवानों पर पड़ रही है। ग्लोबल वार्मिंग का असर साफ दिखने लगा है। सर्दियों में जहां सूखे की स्थिति से किसान-बागवान परेशानी झेल रहे हैं। वहीं फ्लॉवरिंग स्टेज से लेकर नकदी फसल को मंडियों तक पहुंचाने में दुश्वारियां बनी रहती हैं। वीरवार शाम को जहां कई इलाकों में झमाझम बारिश हुई, तो कई क्षेत्रों में अंधड़ ने तबाही मचाई। रामपुर के कई ऊंचे इलाकों में भी भारी बारिश हुई, जबकि निचले क्षेत्रों में अंधड़ का कहर रहा। राजपुरा में कई बागवानों के प्लम की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है, जबकि कई बागवानों को आंशिक नुकसान हुआ है। तेज अंधड़ से पेड़ों से फल जमीन पर गिरे और कई पेड़ों की फलों से लदी टहनियां टूट गईं।
बेहतर उत्पादन की टूटी उम्मीद
देवेंद्र सिंह, लायक राम, मोहन सिंह और सुरेंद्र ने कहा कि अंधड़ से प्लम की फसल को नुकसान पहुंचा है। करीब 10 दिन बाद प्लम का सीजन भी शुरू होने वाला है, लेकिन मौसम कहर बरपा रहा है। इस वर्ष पेड़ों में अच्छी फसल टिकी हुई थी, लेकिन खराब मौसम के कारण बेहतर उत्पादन की उम्मीद टूट गई है। यदि मौसम का कहर यूं ही रहा, तो फसल पूरी तरह तबाह हो जाएगी। उन्होंने प्रशासन और विभाग से नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजे की मांग उठाई है।
राजपुरा क्षेत्र में अंधड़ ने प्लम की फसल पर बरपाया कहर। संवाद