संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। सिविल अस्पताल रोहड़ू में स्टाफ की तैनाती को लेकर प्रदेश उच्च न्यायालय के संज्ञान के आठ माह बीतने के बाद भी अस्पताल में स्टाफ नर्सों की तैनाती नहीं हुई है। नर्साें की भारी कमी के चलते अस्पताल में सभी तरह के रूटीन के ऑपरेशन बंद कर दिए गए हैं। स्पेशल वार्ड में करीब चार महीने से ताले लगे हैं। अस्पताल में ऊपर की दो मंजिलों को बंद करके रोगी निचली मंजिलाें में स्थानांतरित कर दिए गए हैं। यह हाल उस समय है जब यह अस्पताल क्षेत्र के लोगों की लाइफलाइन है। अस्पताल में हर रोज पांच से अधिक मरीजों की ओपीडी है। प्रदेश उच्च न्यायालय की ओर से 18 मई को सिविल रोहड़ू अस्पताल में नर्सों की कमी के मामले पर कड़ा संज्ञान लिया गया। इसके बाद कोविड के तहत तैनात दस नर्साें की फिर से सेवाएं समाप्त की गई। अब अस्पताल में पंद्रह नर्सें की सेवाएं दे रही है। उनमें मरीजों की देखरेख के लिए केवल आठ नर्सें दिन-रात दो सौ बिस्तर के अस्पताल में तैनात हैं। रोहड़ू अस्पताल में स्टाफ नर्सों के कुल 31 पद स्वीकृत है। इसमें से 16 पद रिक्त हैं। कुछ नर्सें मैटरनिटी लीव पर है, तो एक नर्स की तैनाती बल्ड बैंक में की गई है। 200 बिस्तरों की क्षमता वाले अस्पताल में मरीजों की देखभाल के लिए मात्र आठ नर्सें शिफ्टों में कार्य करती हैं। ऑपरेशन के बाद मरीजाें को नर्सिंग केयर की आवश्यकता रहती है लेकिन अस्पताल में नर्सों कमी के कारण मरीजों की देखभाल की उचित सुविधा नहीं होने पर प्रबंधन ने रूटीन के ऑपरेशन अक्तूबर से बंद कर दिए हैं। अस्पताल में केवल आपातकालीन स्थिति में ही ऑपरेशन किए जा रहे हैं। अस्पताल में प्रतिदिन पांच सौ से अधिक मरीजों की ओपीडी है। हर माह 150 से अधिक महिलाओं का प्रसव करवाया जाता है। गर्भवती महिलाओं की देखभाल करने में स्टाफ नर्स की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। अब स्टाफ की कमी के कारण इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
कोट्स
अस्पताल में स्टाफ नर्सों की भारी कमी के कारण अधिकांश रूटीन के ऑपरेशन बंद करने के पड़े हैं। आपातकालीन स्थिति में ही ऑपरेशन किए जा रहे हैं। सरकार ने दो महीने पहले यहां के लिए प्रतिनियुक्ति पर सात से आठ नर्सों के आदेश जारी किए हैं, उनमें केवल एक ने ही ज्वाइन किया है। नर्सों के खाली पदों के संबंध में विभाग के अधिकारियों को पहले से जानकारी है।
डॉ रविंद्र शर्मा एमएस रोहड़ू अस्पताल