फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rampur Bushahar News: स्वर्ग प्रवास पर रवाना हुए क्षेत्र के देवी-देवता, मंदिरों के कपाट हुए बंद

विज्ञापन
विज्ञापन
देवता साहिब नरेशर लक्ष्मी नारायण सहित देवी-देवताओं को लोगों ने पूजा पाठ के बाद खिचड़ी का प्रसाद देकर किया विदा
विज्ञापन


संवाद न्यूज एजेंसी

रामपुर बुशहर। देव संस्कृति में माघ मास में मनाए जाने वाला साजे का त्योहार की अलग पहचान है। वर्षों पुरानी देव परंपराओं को समेटे इस पर्व में आज भी पुराने रीति रिवाज देखने को मिलते हैं। रविवार को मकर संक्रांति पर्व पर रामपुर उपमंडल के विभिन्न क्षेत्रों के देवी-देवता एक माह के स्वर्ग प्रवास पर रवाना हो गए हैं। अब अगले एक माह तक मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान और पूजा पाठ सहित अन्य कर्मकांडों पर रोक रहेगी। रविवार को देवताओं में आस्था रखने वाले हजारों लोग अपने-अपने आराध्य के मंदिर पहुंचे और आशीर्वाद प्राप्त किया। श्रद्धालुओं ने देवताओं की पूजा पाठ कर खिचड़ी का प्रसाद चढ़ाया।

देव परंपरा के प्रतीक मकर संक्राति को ऊपरी हिमाचल में अलग ही रंग में मनाया जाता है। मकर संक्रांति पर सुबह ही लोग नहा धोकर पूजा पाठ करते हैं। इसके बाद श्रद्धालु अपने-अपने आराध्य की पूजा पाठ कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। रविवार को भी ग्रामीणों ने धार्मिक परंपरा का निर्वहन करते हुए देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की। क्षेत्र के आराध्य देवता नरेशर लक्ष्मी नारायण, देवता साहिब जाख रचोली, दमुख देवता डंसा, देवता साहिब गसोह सहित अन्य देवी-देवता एक माह के स्वर्ग प्रवास पर निकल गए हैं। अब एक माह तक मंदिर सुने रहेंगे और किसी भी प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान नहीं होंगे। मान्यता है कि हर वर्ष मकर संक्रांति के दिन देवता इंद्रदेव की सभा में शामिल होने के लिए देवालयों से निकलते हैं। हालांकि देवताओं के लौटने की अवधि अलग-अलग रहती है, जबकि अधिकांश देवता एक माह बाद ही स्वर्ग प्रवास से लौटते हैं। देवताओं के लौटने के बाद ग्रामीणों को वर्षफल सुनाया जाता है। इसमें वर्षभर की गतिविधियों, मौसम और आपदा सहित अन्य फलादेश शामिल रहते हैं। देवता साहिब नरेशर लक्ष्मी नारायण कुमसू मंदिर समिति के अध्यक्ष गुलाब चौहान, उपाध्यक्ष सोनू कायथ, सोहन लाल, गुर भजन दास, पुजारी लायक राम, हिरालाल, शेर सिंह और दीपक मेहता सहित अन्यों ने बताया कि मकर संक्रांति पर्व पर सुबह से ही मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहा। ग्रामीणों को आशीर्वाद देकर देवता एक माह के स्वर्ग प्रवास पर निकल गए हैं। अब एक माह तक मंदिरों में सभी प्रकार के कार्यों पर रोक रहेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन



बॉक्स

धूप की जगह अब एक माह तक पाजे से होता है पूजन

देवताओं के स्वर्ग प्रवास पर जाने के बाद अब घरों में एक माह तक धूप जलाई जाती, बल्कि सुगंध से भरपूर पाजे की पत्तियों से पूजन किया जाता है। क्षेत्र में पाए जाने वाले विशेष किस्म के पाजे के पेड़ से पत्तियां निकालकर ग्रामीण एक दूसरे को बांटते हैं और साजे की बधाई देते हैं। इतना ही नहीं अब साजे की खुशी में ग्रामीण अपनी जाइयों और रिश्तेदारों को पारंपरिक व्यंजन भी बांटते हैं। यह प्रथा सदियों से कायम है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें