2016 में शिलान्यास, फिर डिनोटिफाइ और अब स्वीकृति के बाद औपचाकिताओं के पेच में फंसा बहुतकनीकी संस्थान दलाश
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चुनाव के दौरान नेता कर चुके कई बार वादे और घोषणाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
दलाश (कुल्लू)। दलाश में बहुतकनीकी संस्थान खोलने की कई बार घोषणाएं हुईं और नेताओं ने चुनावी मंचों पर वादे भी किए, लेकिन घोषणाओं और वादों की जमीन पर आज तक यह संस्थान नहीं उतरा और जनता के लिए महज छलावा बनकर रह गया। आनी और साथ लगतीं करीब छह विधानसभा क्षेत्रों के लिए पहली बार साल 2016 में कांग्रेस सरकार के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने दलाश में बहुतकनीकी संस्थान खोलने की घोषणा की थी। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सभी विभागीय औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद इसे विभाग को सौंपा, लेकिन कई वर्ष बीतने के बाद भी यह संस्थान औपचारिकताओं में फंसा रहा। साल 2016 में घोषणा होने के बाद साल 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले निरमंड में इसका शिलान्यास किया गया। साल 2017 के विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद भाजपा सरकार प्रदेश में सत्तासीन हुई और आधी-अधूरी नोटिफिकेशन कहकर संस्थान को डिनोटिफाइड कर दिया। फिर दोबारा भाजपा सरकार ने साल 2018 में इसे कैबिनेट से स्वीकृति प्रदान करके दलाश बहुतकनीकी संस्थान में 5 ट्रेड के साथ 97 पदों को स्वीकृति प्रदान की। आनी विधानसभा क्षेत्र में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान सभी पार्टियां और आजाद प्रत्याशियों ने इसे जल्द खोलने का हर मंच से वादा किया, लेकिन चुनाव संपन्न होने के बाद नेताओं के मुंह से संस्थान का नाम गुम हो जाता है। संस्थान का मुद्दा लंबे समय से एफसीए के फेर में फंसा हुआ है और इससे जुड़ी फाइलें कार्यालय में धूल खा रही हैं। आनी और साथ लगतीं करीब आधा दर्जन विधानसभा क्षेत्रों में अभी तक इस तरह का कोई संस्थान नहीं खोला गया है। संस्थान बनने से सभी विधानसभा क्षेत्रों के बच्चों को घरद्वार में ही अच्छी टेक्निकल शिक्षा प्राप्त होगी। स्थानीय जनप्रतिनिधियों दलाश पंचायत प्रधान सत्येंद्र शर्मा, उप प्रधान सोहनी राम राठी, व्युंगल पंचायत प्रधान जालप राम, डिंगीधार पंचायत प्रधान बंसी लाल और आनी बीडीसी चेयरमैन विजय कंवर सहित अन्य ने विभाग और सरकार से संस्थान की बची हुई औपचारिकताएं जल्द पूरी कर संस्थान का काम जल्द शुरू करने की मांग उठाई है।
भवन के नक्शे के लेआउट प्लान पर भारत सरकार ने ऑब्जेक्शन लगाकर उसे ठीक करने और फिर से बनाकर भेजने को कहा है। जिसे ठीक करने के लिए करीब एक माह पहले लोक निर्माण विभाग के चीफ आर्किटेक्चर के कार्यालय को भेज दिया गया है। लोक निर्माण विभाग से प्लान फिर से बनकर तैयार होगा और केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। अक्षय सूद, डायरेक्टर तकनीकी शिक्षा