पूर्व अध्यक्ष एवं वर्तमान पार्षद के पिता पर राष्ट्रीय राजमार्ग पर अतिक्रमण करने की शिकायत
ठियोग की स्वयंसेवी संस्था आस्था फाउंडेशन ने दर्ज करवाई है शिकायत, शहरी विकास विभाग ने की कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
ठियोग( रामपुर बुशहर)। शहरी विकास विभाग हिमाचल प्रदेश ने ठियोग नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष एवं वर्तमान पार्षद विवेक थापर को पार्षद पद के लिए अयोग्य ठहराया है।
ठियोग की स्वयंसेवी संस्था आस्था फाउंडेशन के उपाध्यक्ष सुशील शर्मा ने विवेक थापर के पिता पर राष्ट्रीय राजमार्ग-5 पर अतिक्रमण करने की शिकायत दर्ज करवाई थी। विभाग ने शिकायत पर फैसला सुनाते हुए विवेक थापर को पार्षद पद के लिए अयोग्य करार दिया है। विवेक थापर वार्ड तीन से पार्षद हैं। इसके अलावा थापर पिछले वर्ष तक अध्यक्ष रहे हैं। थापर के अयोग्य घोषित हो जाने के बाद परिषद में पार्षदों की संख्या छह रह गई है। इसी वर्ष नगर परिषद के चुनाव करवाए जाने हैं।
सात सदस्यों वाली परिषद में विवेक थापर के खिलाफ इसी साल जनवरी में अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। अविश्वास प्रस्ताव पर एकमात्र पार्षद व शहरी अध्यक्ष अनिल ग्रोवर तटस्थ की भूमिका में रहे, जबकि पांच पार्षदों ने प्रस्ताव को सहमति दी थी। प्रस्ताव पर वोटिंग होने से पहले ही विवेक थापर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद थापर के समर्थन से संजय शर्मा मार्च में अध्यक्ष बने। विवेक थापर के अयोग्य घोषित हो जाने के बाद संजय शर्मा की ताजपोशी से दूरी बनाए रखने वाले तीन अन्य पार्षद शीला वर्मा, रीना रॉय और नीतू मेहता भविष्य में क्या रुख अपनाते हैं, अब यह देखना दिलचस्प होगा।
उधर, नगर परिषद ठियोग के वार्ड नंबर तीन के पार्षद विवेक थापर ने बताया कि विभाग के निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं। कहा कि आरोप व्यक्तिगत, निजी स्वार्थ और आधारहीन हैं। निर्णय के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करेंगे। कोई भी अतिक्रमण नहीं किया गया है।
वही, आस्था फाउंडेशन के उपाध्यक्ष सुशील शर्मा ने बताया कि नगर परिषद की कार्यप्रणाली से संतुष्ट नहीं होने और एनएच पर अतिक्रमण में पार्षद के पिता का नाम आने के बाद शिकायत दर्ज करवाई थी।
कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद ठियोण वरूण शर्मा ने बताया कि वार्ड नंबर तीन के पार्षद को अयोग्य घोषित करने की सूचना दे दी गई है। नियमानुसार एक साल के भीतर अध्यक्ष पद के खिलाफ दूसरा अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता। इसी वर्ष नगर परिषद के चुनाव होने हैं। पार्षद पद के लिए नए चुनाव के बार में अंतिम निर्णय चुनाव आयोग ही ले सकता है।