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Rampur Bushahar News: सात पार्षदों में एक भी नहीं पहुंचा, ठियोग के नप अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव टला

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कोरम पूरा न होने पर कार्यालय में नहीं पहुंचे कोई भी पार्षदगण। संवाद
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द्वेषभाव की सियासत में टला चुनाव, लटके विकास
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सात में पांच पार्षद कांग्रेस और दो भाजपा समर्थित, फिर भी फंसा पेंच

लोगों का आरोप-पार्षदों के आपसी द्वेषभाव का खामियाजा भुगत रही जनता

संवाद न्यूज एजेंसी

ठियोग (रामपुर बुशहर)। ठियोग नगर परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव सोमवार को कोरम पूरा न होने के कारण टल गया। सात पार्षदों में से एक भी पार्षद चुनावी प्रक्रिया में शामिल नहीं हुआ। गौर हो कि नगर परिषद के सात वार्डों में से कांग्रेस समर्थित पांच पार्षद हैं, इसके बावजूद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए पेंच फंसा हुआ है। वहीं, क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि पार्षदों के आपसी द्वेषभाव के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। सोमवार को दोनों पदों के लिए चुनाव प्रक्रिया एसडीएम मुकेश शर्मा की अध्यक्षता में शुरू हुई, लेकिन सात पार्षदों में से एक भी पार्षद इस प्रक्रिया में भाग लेने नहीं पहुंचा। पार्षदों के गैर मौजूदगी के कारण एसडीएम कार्यालय में 11 बजे शुरू हुई चुनावी प्रक्रिया को पहले साढ़े बारह बजे टाल दिया। इसके बाद भी कोई पार्षद नहीं पहुंचा, तो प्रक्रिया को अगली तारीख तक टाल दिया। अब नौ तारीख को दोनों पदों के लिए चुनाव करवाएं जाएंगे। अब चार पार्षदों का सामान्य कोरम पूरा होना जरूरी होगा। इस नियम के अनुसार ही चुनावी प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी।
सोमवार को चुनावी बैठक में सात पार्षदों में से एक भी पार्षद के शामिल न होने से सीधा अर्थ निकाला जा सकता है कि आपसी मतभेद की खाई सामान्य से अधिक बढ़ चुकी है। सूत्रों के अनुसार पार्षदों के बीच गठजोड़ की राजनीति सफल नहीं हो पाई है। राजनीति को धरातल पर उतारने में माहिर जनप्रतिनिधि यदि आने वाले दिनों में आपसी तालमेल में सफल हुए, तो चुनाव संपन्न होने की उम्मीद रहेगी। परिषद के यह दोनों पद पिछले पांच सालों में तीन बार चुनावी प्रक्रिया का दंश झेल चुके हैं। कुर्सी के लिए जनप्रतिनिधियों की इस आपसी लड़ाई में एक ओर विकास कार्य प्रभावित होते हैं, वहीं दूसरी ओर जनता का लोकतांत्रिक व्यवस्था से विश्वास डगमगाने लगा है।
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दोनों पदों के लिए हों सीधे चुनाव

जनप्रतिनिधियों की आपसी खींचतान से त्रस्त जनता ने सरकार से दिसंबर माह में होने वाले आगामी चुनावों में दोनों महत्वपूर्ण पदों के लिए सीधे चुनाव करवाने की अपील की है। लोगों का कहना है कि पार्षदों की आपसी और द्वेषभाव का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। यदि दोनों पदों पर सीधे चुनाव होंगे, तो पार्षदों की इस आपसी लड़ाई से जनता को राहत मिल सकेगी और विकास कार्यों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
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कांग्रेस के पास बहुमत, लेकिन नहीं बन पा रही सरकार

सात पार्षदों वाली परिषद में पांच पार्षद कांग्रेसी विचारधारा के हैं और दो भाजपा समर्थित हैं। कांग्रेस पार्षदों में आपसी लड़ाई के कारण एक साल पहले बनाई गई नगर परिषद में भाजपा ने उपाध्यक्ष पद पर जीत हासिल की थी, लेकिन कांग्रेस समर्थित पार्षदों ने इस हार से कोई सबक नहीं लिया। इस बार भी आपसी तालमेल न होने के कारण कांग्रेसी पार्षदों एक पटल पर खड़े दिखाई नहीं दे रहे हैं। इसका उदाहरण सोमवार को चुनावों के लिए हुई पहली बैठक में देखा गया। - संवाद
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