संवाद न्यूज एजेंसी
नेरवा (रोहड़ू)। नेरवा कस्बा मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। परिवहन और जल आपूर्ति व्यवस्था का बुरा हाल है। नेरवा में रोजाना करीब दो हजार छात्र विभिन्न शिक्षण संस्थानों में शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोग सरकारी कार्यालयों में काम करवाने व बाजार से खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। एक खाली मैदान पर जेसीबी चलाकर साल 2012 में तत्कालीन सरकार ने बस अड्डे का नाम दे दिया। आज भी परिवहन निगम के पास इस बस अड्डे में अपना खुद का बुकिंग ऑफिस तक नहीं है। बड़ी मुश्किल से बस अड्डे के चारों तरफ अस्थायी टीन का शेड और वर्षा शालिका ही बन पाई है। नई बसें चलाना तो दूर नेरवा स्थित परिवहन निगम के डिपो की ओर से संचालित 22 से अधिक रूट बंद कर दिए गए हैं। शालवी नदी के किनारे बसे होने के बावजूद नेरवा के लोग अक्सर पानी के लिए तरसते रहते हैं। करीब 20 साल पहले बनी खद्दर नाला-नेरवा प्रवाह पेयजल योजना के स्रोत में भरपूर मात्रा में पानी उपलब्ध होने के बावजूद नेरवा निवासियों को पर्याप्त पानी नसीब नहीं हो पा रहा है। इस मुख्य कारण इस स्कीम के बनाते समय हुई कथित अनियमितताएं हैं। हैरानी की बात यह है कि लगभग पांच हजार लोगों के लिए बनाई इस पेयजल योजना का जल भंडारण टैंक ही नहीं बनाया गया है। योजना के पाइप अधिकतर स्थानों पर जमीन के ऊपर ही बिछाए गए हैं। इस करण यह अक्सर टूटते रहते हैं। नतीजतन, नेरवा निवासियों को आए दिन पेयजल किल्लत से जूझना पड़ता है।
जल भंडारण टैंक बनवा दिया
जल शक्ति विभाग नेरवा के सहायक अभियंता नरेंद्र शर्मा ने बताया कि विभाग ने अब इस योजना का जल भंडारण टैंक बनवा दिया है। बीते सप्ताह सड़क निर्माण के दौरान लाइन टूट गई थी। जिसे विभाग ने ठीक कर दिया था।