मरीजों की 20 किलोमीटर दूर भावानगर और टापरी की लग रही दौड़
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ग्रामीणों ने सरकार और विभाग से शीघ्र स्टाफ की तैनाती की उठाई मांग संवाद न्यूज एजेंसी सांगला (किन्नौर)। प्रदेश सरकार के दुर्गम क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवाने के दावे धरातल पर खोखले साबित हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों को घरद्वार उपचार की सुविधा के लिए तरसना पड़ रहा है। ऐसा ही हाल जिला किन्नौर के उप स्वास्थ्य केंद्र पानवी का है। इस केंद्र में वर्ष 2020 से ताला लटका हुआ है। महिला और पुरुष स्वास्थ्य कर्मी का पद रिक्त चल रहा है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग सिर्फ टीकाकरण के लिए डेपुटेशन पर कर्मी भेज रहा है। ऐसे में पांच गांवों की 800 की आबादी उपचार के लिए परेशानी झेल रही है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग ग्रामीणों की स्वास्थ्य सुविधाओं की सुध नहीं ले रही है। उप स्वास्थ्य केंद्र पानवी में स्टाफ न होने के कारण पानवी खास, जोकटयांरिंग, बुरचा, होजिंगे और कुलींगे गांव के सैकड़ों मरीज परेशान हैं। मरीजों को उपचार के लिए पानवी से 20 किलोमीटर दूर सिविल अस्पताल भावानगर और टापरी जाना पड़ रहा है। उपप्रधान पानवी पंचायत बुद्धा राम नेगी, पूर्व उपप्रधान पानवी सतीश नेगी, महिला मंडल अध्यक्ष सीता देवी नेगी, बीडीसी अध्यक्ष निचार खंड भावना नेगी, रेणुका नेगी, यशी डोलमा नेगी, अश्वनी नेगी, संदीप नेगी और सूर्यकांत नेगी ने कहा कि स्टाफ न होने के कारण मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही हैं। उन्होंने सरकार और विभाग से शीघ्र स्टाफ की तैनाती करने की मांग उठाई है, ताकि मरीजों को राहत मिल सके।
रिक्त पद को लेकर सरकार और उच्चाधिकारियों को पत्राचार किया गया है। सरकार की ओर से अब नई भर्ती प्रक्रिया के तहत उप स्वास्थ्य केंद्र का जिम्मा कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) संभालेंगी। उम्मीद है कि जल्द ही स्टाफ की तैनाती होगी। डॉ. आरके नेगी, सीएमओ किन्नौर