सांगला (किन्नौर)। किन्नौर जिले के कल्पा और निचार खंड की हजारों की आबादी को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने वाले छोल्तू जिंदल संजीवनी अस्पताल में लंबे समय से चिकित्सकों की कमी चल रही है। इससे परियोजना प्रभावित 21 पंचायतों के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं से महरूम रहना पड़ रहा है।
ग्राम पंचायत पूनंग के उपप्रधान वीरेंद्र नेगी, पंचायत प्रधान मीरू नरेंद्र नेगी, किल्बा शंकर भगत नेगी, पंचायत प्रधान चगांव कांता देवी, पंचायत प्रधान उरनी अनिल नेगी, पंचायत प्रधान यूला अंजू नेगी, पंचायत प्रधान रामनी सुनीता नेगी, उपप्रधान उरनी सुरेश नेगी सहित अन्य प्रतिनिधियों ने कहा कि दो दिन पूर्व वे जेएसडबल्यू के परियोजना प्रमुख से अस्पताल और स्कूल की समस्याओं को लेकर मिले थे लेकिन प्रबंधन ने जनप्रतिनिधियों के साथ दुर्व्यवहार किया। इससे प्रभावित पंचायतों के प्रतिनिधियों में भारी गुस्सा है।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र की 21 पंचायतों के हजारों लोग अस्पताल पर निर्भर हैं। अस्पताल में सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, ईएनटी, रेडियोलॉजिस्ट सहित मेडिसिन विभाग के चिकित्सकों के पद रिक्त चल रहे हैं। इस कारण अस्पताल में केवल प्राथमिक उपचार की सुविधा मिल रही है। पूनंग पंचायत उपप्रधान वीरेंद्र नेगी ने कहा कि परियोजना के अधिकारी ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के बजाय धमकी देने लगे। उन्होंने परियोजना प्रबंधन से संबंधित पंचायतों के जनप्रतिनिधियों से नैतिकता के आधार पर माफी मांगने को कहा।
इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि जिंदल विद्या मंदिर स्कूल में प्रभावित पंचायतों के बच्चों को नहीं लिया जा रहा। परियोजना प्रबंधन ने 21 प्रभावित पंचायतों के सिर्फ 40 बच्चे ही लिए जा रहे हैं। जनप्रतिनिधियों ने चेताया है कि अगर जल्द उनकी मांगों की सुनवाई नहीं हुई तो वे परियोजना प्रबंधन के खिलाफ उग्र प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। परियोजना प्रमुख कौशिक मौलिक ने कहा कि परियोजना प्रबंधन ने स्थानीय लोगों के साथ दुर्व्यवहार नहीं किया गया। उन्होंने माना कि अस्पताल में चिकित्सकों की कमी चल रही है जिसे जल्द दूर किया जाएगा।