रिवाड़ी गांव के खौधार ठिरशू में प्रस्तुति देतीं महिलाएं।
दलाश (कुल्लू)। दलाश पंचायत के रिवाड़ी गांव में ऐतिहासिक खौधार ठिरशू मेला मंगलवार को संपन्न हो गया। देव विदाई के साथ दो दिवसीय मेला समाप्त हुआ। ठिरशू मेला बैसाख मास की 4 और 5 प्रविष्टे को मनाया जाता है। इस वर्ष ठिरशू मेला नए स्वरूप के साथ मनाया गया। मेले में क्षेत्र के आराध्य देवता जोगेश्वर महादेव दलाश शिरकत करते हैं।
इस वर्ष शाणी दुर्गा माता विशेष रूप से उपस्थित रहीं। बैसाख मास के 4 प्रविष्टे को आराध्य देवता जोगेश्वर महादेव राम मंदिर रिवाड़ी पहुंचते हैं और यहां रिवाड़ी गांव के ग्रामीण उनका पारंपरिक रीति रिवाज से भव्य स्वागत करते हैं। क्षेत्र की महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा और स्थानीय लोकगीतों से देवता का गांव में पहुंचने पर स्वागत करती हैं।
सोमवार को जब दोनों देवी-देवता राम मंदिर रिवाड़ी पहुंचे, तो ग्रामीणों ने भव्य स्वागत किया। रातभर राम मंदिर में ग्रामीणों ने भजन-कीर्तन किया। बुजुर्ग और युवाओं ने दशू गीत गाकर नाटी डाली। मंगलवार को राम मंदिर रिवाड़ी से ठिरशू स्थल खौधार तक दोनों देवी-देवताओं के रथ को लोगों ने नाच गाकर पहुंचाया।
यहां सैकड़ों की संख्या में उपस्थित लोगों ने दोनों देवी-देवताओं का भव्य स्वागत किया। इस दौरान रस्साकशी और लोकनृत्य प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। मेले में समाजसेवी घनश्याम शर्मा बतौर मुख्यातिथि शरीक हुए। हिमादित्य पंचांग के रययिता पंडित उमाशंकर दीक्षित ने बताया कि ठिरशू मेला नए संवत के शुभारंभ और नव ऋतु के आगमन पर मनाया जाता है। इसके बाद ही क्षेत्र में बाकी मेले आयोजित किए जाते हैं। संवाद