संवाद न्यूज एजेंसी
डंसा (रामपुर बुशहर)। रामपुर उपमंडल के मध्यम और निचले सेब बहुल क्षेत्रों में इस नकदी फसल पर संकट के बादल छा गए हैं। तापमान में अत्यधिक बढ़ोतरी से सेब के पेड़ों पर कीटों का प्रकोप फैलने से बागवानों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
कीटों के हमले से सेब फसल बर्बाद हो रही है। हालांकि कीटों के प्रकोप से सेब को बचाने के लिए बागवानों द्वारा कीटनाशक स्प्रे का इस्तेमाल भी किया जा चुका है, लेकिन इसका असर भी अगले 72 घंटों तक ही रहता है। ऐसे में बागवान लाचार हैं कि आखिर कैसे सेब के दानों को कीटों के हमले से बचाया जाए। वहीं सूखे की मार के कारण निचले और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जमीन में नमी न होने के चलते सेब की ड्रॉपिंग की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। चौतरफा मार झेल रहे बागवानों की साल भर की मेहनत पर हर साल प्राकृतिक आपदा से बचाने के लिए सरकार एवं विभाग के पास कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं।
बागवानों को चिंता सता रही है कि यदि अगले कुछ दिनों में बारिश न हुई तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। वहीं आए दिन जंगलों में आग की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। इससे जहां वन संपदा को भारी नुकसान पहुंच रहा है, वहीं पर्यावरण भी दूषित हो रहा है। बारिश न होने से सेब का साइज न बढ़ने से भी बागवानों की नींद उड़ी हुई है। मौसम की बेरुखी बागवानों पर भारी पड़ रही है। बागवान निराश और हताश हैं कि आखिर करें तो क्या करें।
प्रगतिशील बागवान पवन हुड्डन, बंसी लाल कायथ, सुंदर सिंह, सूरज नेगी, दिनेश कायथ, लायक राम, दौलत राम, जगत सिंह, कमल चाई, कुलदीप सिंह, हिम्मत मसोई, सूरज नेगी और घनश्याम सहित अन्य बागवानों ने चौतरफा मार झेल रही बागवानी को आपातकाल के तौर पर घोषित करने की सरकार और विभाग से पुरजोर मांग उठाई है।