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दवाइयों के नाम पर बागवानों से हो रही खुली लूट

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रोहड़ू। क्षेत्र के सेब बगीचों में पतझड़ रोग तेजी से फैलना शुरू हो गया है। इससे बागवानों की चिंताएं बढ़ गई है। आलम यह है कि बागवान बीमारी को रोकने के लिए हजारों रुपये की दवाइयों का इस्तेमाल कर चुके हैं। मगर इसके बाद भी बीमारी का समाधान नहीं हो रहा है। इससे बीमारी को रोकने के लिए मंहगी दवाइयों को बेचने की एक नई लूट खुलकर सामने आने लगी है।
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खासकर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पतझड़ की बीमारी ने बागवानों की मुश्किलें बढ़ा दी है क्योंकि यहां सेब सीजन चल रहा है। बारिश के बाद सेब बगीचों में पत्तों पर पीले और काले धब्बे पड़ना शुरू हो गए हैं। इससे बीमारी का संक्रमण तेज होने से दो चार दिन में ही पत्ते झड़ जाते हैं। पत्ते झड़ने से अगले साल फसल भी प्रभावित होने की आशंका रहती है।
बागवानों का कहना है कि उद्यान विभाग की सारिणी के अनुसार विशेषज्ञ की राय के बाद बगीचों में लगातार दवाइयों का छिड़काव करने पर संक्रमण नहीं रुक रहा है। सेब सीजन पूरा होने में अभी एक महीने का समय बचा है। मगर बीमारी को रोकना बागवानों की पहुंच से बाहर हो चुका है। जबकि पतझड़ की बीमारी को रोकने के लिए एक ड्रम पानी में पांच सौ से एक हजार रुपए तक की दवाई का खर्च होता है। बागवान सवाल उठा रहे हैं कि सेब के डॉक्टर अब गायब, बगीचों के रखरखाव की जानकारी देने वाला सरकारी तंत्र खामोश है।
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बाजार से मंहगी दवाइयां बीमारी की रोकथाम नाम पर खरीदी गई दवाई कंपनियां लाखों रुपए कमा चुकी है। मगर बागवान फिर भी परेशान है। सोमवार को प्रदेश व्यापी बंद को दौरान कई बागवानों ने मंच से इसका खुलासा भी किया। उन्होंने साफ कहा दवाई कंपनियों से लेकर मंडियों तक बागवानों के साथ लूट होती है। सरकार की ओर से हर मामले को नजरअंदाज किया जाता रहा है। अब बागवान किसी भी मामले में चुप बैठने वाला नहीं है।
प्रदेश संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक हरीश चौहान ने कहा कि सच्चाई यह है कि कंपनियां मंहगी दवाइयों के नाम पर बागवानों के करोड़ों रुपए डकार रही है। अब बीमारी फैलने के बाद बागवान परेशान है।
उन्होंने कहा बाजार में बिक रही सेब की दवाइयों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं रखा गया है। सरकारी केंद्रों में दवाइयां पहले ही बंद हो चुकी है। उन्होंने कहा किसानों बागवानों के साथ चारो तरफ से लूट का खेल चल रहा है। हर मुद्दे को किसानों बागवानों के मंच पर उठाया जाएगा।
कृषि विज्ञान केंद्र रोहडू़ के प्रभारी और बागवानी विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र कायथ का कहना है कि बारिश के बाद मार्सोनिना और अल्टरनेरिया की बीमारी का संक्रमण पत्तों पर तेजी से फैलता है। अगर बीमारी को रोका नहीं गया तो फसल खराब होने की आशंका रहती है। समय से पहले पत्ते गिरने से पौधा कमजोर हो जाता है। इस कारण अगले साल भी फसल प्रभावित होने की आशंका रहती है।
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