अच्छी गुणवत्ता के सेब के नहीं बेहतर दाम न मिलने से गढ के चक्कर में बाहर की मंडियों का रुख कर चुके बागवान
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। मौसम खुलने के बाद सेब सीजन पूरी रफ्तार में शुरू हो चुका है। वहीं, ऊंचाई वाले क्षेत्रों के सबसे अच्छी गुणवत्ता वाले सेब के बागवानों को बाजार में अच्छे दाम नहीं मिल रहे। अब फल के दाम और गढ बिक्री के लिए बागवान प्रदेश के बाहर की मंडियों का रुख कर रहे हैं।
बीते कुछ दिनों से खराब मौसम रहने और दिनभर बारिश के कारण सेब तुड़ान कम हुआ था। इससे प्रदेश और बाहर की मंडियों में सेब की पहुंच कम हो रही थी। बीते तीन दिनों से बड़ी कंपनियों ने भी सेब की खरीद शुरू कर दी है। उसके बाद भी बाजार में सेब के भाव में तेजी नजर नहीं आई। अब ऊंचाई वाले क्षेत्रों से अच्छी गुणवत्ता वाले सेब आने शुरू हो गए हैं। प्रदेश की सब मंडियों में छोटे आकार के सेब के दाम में बड़े आकार के दाम की तुलना में तीस प्रतिशत कटौती चल रही है। इस कारण अब अधिकांश बागवान प्रदेश के बाहर की मंडियों में ही अधिक सेब बेच रहे हैं। गढ और दर के चक्कर में बागवान हिमाचल की मंडियों में सेब बेचने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इससे प्रदेश की मंडियों में सेब की आमद कम है। शिमला सहित पराला और नारकंडा की मंडियों में इस बार सेब दर के हिसाब से बिक रहे हैं, यानी आढ़ती सेब साइज के हिसाब से खरीद कर रहे हैं। हालांकि, इसका बागवान विरोध करते आए हैं। पिंजौर और कई अन्य मंडियों में सेब गढ के हिसाब से बिक रहा है। हर दिन पिंजौर मंडी में करीब एक लाख सेब की पेटियां बिकने के लिए पहुंच रही हैं। सूखे के कारण सेब का छोटा आकार रहने से बागवान सेब को गढ के हिसाब में बेचने में लाभ समझ रहे हैं।
उम्मीदों के अनुरूप नहीं मिल रहे दाम
मंडियों में आजकल 1,000 से 1,800 रुपये अधिकतम सेब के दाम मिल रहे हैं। बागवान सुरेश चौहान का कहना है कि मंडियों में सेब के दाम उम्मीदों के अनुरूप कम मिल रहे है। प्रदेश की मंडियों में सेब दर के हिसाब से बिकने के कारण नुकसान हो रहा है। बागवान अजय कुमार का कहना है कि निजी कंपनियों ने भी सेब के दाम पिछले साल की तुलना दस से पंद्रह रुपये प्रति किलो कम कर दिए हैं, इसलिए कई बागवान प्रदेश के बाहर की मंडियों में बेहतर विकल्प तलाश रहे हैं। कुछ दाम कम होने के कारण सेब को कोल्ड स्टोर में डाल रहे हैं।
बागवानों को नहीं मिल रहे उचित दाम
बागवानी विशेषज्ञ डाॅ. नरेंद्र कायथ का कहना है कि इस साल एक महीने में एक हजार रुपये से पंद्रह सौ रुपये प्रति पेटी सेब के दाम घटना बागवानी के लिए खतरे की निशानी है। फल का बाजार मांग और आपूर्ति पर र्निभर करता है। भविष्य में इस पर सरकार को विशेष मंथन की जरूरत है, ताकि हर बागवान को अपनी नगदी फसल का पर्याप्त दाम मिल सके।