रोजगार के नाम पर भी प्रभावितों को ठगा जा रहा
हिमाचल किसान सभा ने नीरथ में बैठक कर आंदोलन की रणनीति की तैयार
10 जनवरी को होगा अधिवेशन, गांव-गांव में होंगी बैठकें
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। निर्माणाधीन लूहरी परियोजना के प्रभावित अपने हक के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। बीते लंबे समय से परियोजना प्रभावितों को न प्रदूषण का पैसा मिला है और न ही मकानों में आई दरारों का मुआवजा मिला है। परियोजना ने प्रभावितों को रोजगार के नाम पर भी ठगने का कार्य किया है। नीरथ में आयोजित बैठक में कई ज्वलंत मुद्दे गरमाए और परियोजना के खिलाफ रोष जताया गया।
शनिवार को हिमाचल किसान सभा निरमंड, रामपुर और कुमारसैन उपमंडलों की बैठक नीरथ में हुई। बैठक में लूहरी परियोजना प्रभावितों के मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रभावित किसानों ने अपने अधिकारों को हासिल करने के लिए आंदोलन की रणनीति तैयार की। बैठक में किसान सभा राज्य सचिव डॉ. ओंकार शाद, जिला शिमला सचिव पूर्ण ठाकुर, जिला शिमला अध्यक्ष प्रेम चौहान, किसान सभा निरमंड ब्लॉक के अध्यक्ष देवकी नंद और कृष्णा राणा ने अपने विचार साझा किए। किसान नेताओं ने कहा कि लूहरी परियोजना प्रभावितों को कंपनी की ओर से प्रदूषण और मकानों में आई दरारों का मुआवजा अभी तक नहीं दिया गया है। प्रभावित पंचायतों में विकास कार्यों के लिए जो पैसा खर्च किया जाना है, वह पंचायतों को नहीं दिया जा रहा है। रोजगार के नाम पर भी प्रभावित पंचायतों के लोगों को ठगा गया है। 70 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जाना है। परियोजना के लिए जिन लोगों ने अपनी जमीन दी है, उनको भी स्थायी रोजगार नही दिया गया है। उन्होंने कहा कि किसानों की मांगों को लेकर 10 जनवरी को प्रभावितों का अधिवेशन नीरथ में होगा। इस अधिवेशन को सफल बनाने के लिए जनवरी में गांव-गांव में बैठकें आयोजित की जाएंगी।
इस मौके पर रविंद्र, परम दास, संदीप, मान सुख, किशन, अर्जुन वर्मा, हरदयाल, भगवान दास, जोगिंद्र, दुला राम, कपिल, राजपाल, मालू राम आदि मौजूद रहे।