फल मंडी भट्टाकुफर में बिक्री प्रणाली पर जताया रोष
बागवानों का आरोप, गढ़ प्रणाली के बजाय कीमत घटाकर की जा रही खरीद
पराला सहित अन्य मंडियों जैसी व्यवस्था लागू करने की मांग, प्रति पेटी करीब 900 रुपये तक नुकसान का दावा
एपीएमसी से समान मापदंड लागू करने की मांग
बिना ट्रे वाली पेटी 3000 की बजाय 2,100 रुपये में बिक रही
संवाद न्यूज एजेंसी
कोटखाई (रोहड़ू)। फल मंडी भट्टाकुफर में बिना ट्रे वाली सेब पेटियों की बिक्री व्यवस्था को लेकर बागवानों में नाराजगी बढ़ गई है। बागवानों का आरोप है कि इन पेटियों की बिक्री में गढ़ प्रणाली अपनाने के बजाय कीमत में करीब 30 प्रतिशत तक कटौती की जा रही है। उनका कहना है कि पहले से कम फसल के बीच यह व्यवस्था उन्हें अतिरिक्त आर्थिक नुकसान पहुंचा रही है।
बागवानों के अनुसार प्रदेश की पराला सहित अन्य मंडियों में बिना ट्रे वाली सेब पेटियां गढ़ प्रणाली के आधार पर खरीदी जाती हैं, जबकि भट्टाकुफर मंडी में इनकी कीमत में लगभग 30 प्रतिशत की कटौती की जा रही है। उनका कहना है कि अलग-अलग मंडियों में अलग मापदंड अपनाए जाने से उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है।
बागवानों ने बताया कि यदि ट्रे में पैक सेब की एक पेटी 3,000 रुपये में बिकती है, तो बिना ट्रे वाली उसी पेटी का मूल्य 30 प्रतिशत कटौती के बाद लगभग 2,100 रुपये रह जाता है। इस प्रकार प्रति पेटी करीब 900 रुपये का नुकसान होता है। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में सेब बेचने वाले बागवानों के लिए यह नुकसान लाखों रुपये तक पहुंच सकता है। इस वर्ष कई क्षेत्रों में सेब का उत्पादन पहले ही सामान्य से कम है, जिससे आय प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
बागवानों ने कृषि उपज मंडी समिति (एपीएमसी) से मांग की है कि भट्टाकुफर मंडी में भी पराला और अन्य मंडियों की तर्ज पर गढ़ प्रणाली लागू की जाए। उनका कहना है कि यदि जल्द समान व्यवस्था लागू नहीं की गई तो उनका आर्थिक नुकसान और बढ़ेगा।
बागवान अंकित, पंकज डोगरा, इंदर कुमार, सुरेंद्र शर्मा, संजय बस्टा और अंशुल ने कहा कि कम फसल के कारण उनकी आय पहले ही प्रभावित है। ऐसे में मंडी में की जा रही कटौती उनकी आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर रही है तथा उनकी आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है।