याचिकाकर्ता आदित्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि आदित्य और दिशा यादव ने एक फरवरी 2026 को कांगड़ा के चामुंडा माता मंदिर में अपनी मर्जी से विवाह किया और इसकी सूचना लड़की के परिजनों को भी दे दी गई। लड़की ने 16 फरवरी 2026 को अपने बयान में स्पष्ट किया कि वह अपनी मर्जी से दिल्ली से आई है और उसने स्वेच्छा से विवाह किया है। हालांकि, लड़के की उम्र 21 वर्ष से कम होने के कारण लड़की के परिजनों की शिकायत पर 17 फरवरी 2026 को एक प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
अदालत के सामने यह तथ्य आया कि 29 जून को राजस्थान के कोटपुतली जिला के एसडीएम कार्यालय से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा-100 के तहत लड़की की बरामदगी का एक आदेश हासिल किया गया। इस आदेश में आरोप लगाया गया था कि लड़की को किसी ने बहला-फुसलाकर अगवा किया है। इस आदेश के आधार पर लड़की के परिजनों ने कांगड़ा से लड़की को उसकी मर्जी के खिलाफ बरामद कर लिया। अदालत ने माना कि चूंकि विवाह कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) में हुआ था और लड़की को इसी राज्य के अधिकार क्षेत्र से बाहर ले जाया गया है, इसलिए इस मामले की सुनवाई का अधिकार हिमाचल हाईकोर्ट के पास है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की इस आशंका पर भी गौर किया कि लड़की की जान को खतरा हो सकता है और यह मामला सीधे तौर पर जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा हुआ है।