पहला प्रस्ताव ऊना जिले के बीटन में 75 एकड़ भूमि पर 80 करोड़ रुपये की लागत से औद्योगिक पार्क विकसित करने का है। दूसरा सोलन जिले के नालागढ़ स्थित मझोली औद्योगिक क्षेत्र में 150 एकड़ भूमि पर 154.39 करोड़ रुपये की लागत से औद्योगिक पार्क स्थापित करने का प्रस्ताव है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों परियोजनाएं केवल औद्योगिक विस्तार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रोजगार सृजन और क्षेत्रीय आर्थिक विकास के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं। पार्कों में उद्योगों को आवश्यक आधारभूत सुविधाएं तैयार रूप में उपलब्ध करवाने से निवेशकों को परियोजनाएं स्थापित करने में कम समय लगेगा। इससे हिमाचल में विनिर्माण गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है। सुक्खू ने केंद्रीय वित्त मंत्री से दोनों प्रस्तावों को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक औद्योगिक आधारभूत ढांचे के साथ निवेशक-अनुकूल नीतियां प्रदेश में मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार करने में मदद करेंगी।
रेल नेटवर्क मजबूत होने से घटेगी लॉजिस्टिक्स लागत
मुख्यमंत्री ने हिमाचल के औद्योगिक विस्तार के लिए परिवहन और लॉजिस्टिक्स ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर दिया। उन्होंने केंद्र सरकार से प्रदेश में रेल कनेक्टिविटी बेहतर करने के साथ बद्दी-नालागढ़ रेल लाइन के विस्तार का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बेहतर रेल नेटवर्क से माल ढुलाई की लागत कम होगी और उद्योगों को देश के बड़े बाजारों तक पहुंच बनाने में सुविधा मिलेगी। इससे हिमाचल की विनिर्माण इकाइयों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और निजी निवेश को भी प्रोत्साहन मिलेगा। बैठक में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और प्राधिकरण के सदस्य भी शामिल हुए।