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हिमाचल: पर्यटन विकास को केंद्र सरकार ने मंजूर किए 84 करोड़, रकछम और काजा में सुविधाएं बढ़ेंगी

Mon, 17 Aug 2026 09:46 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

 हिमाचल प्रदेश में पर्यटन ढांचे को मजबूत करने के लिए 84 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मंजूर की है। इस राशि से धार्मिक, सीमावर्ती और दूरदराज के पर्यटन स्थलों पर सुविधाएं विकसित की जाएंगी। 
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पर्यटन विकास को 84 करोड़ मंजूर। - फोटो : अमर उजाला
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केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश में पर्यटन ढांचे को मजबूत करने के लिए 84 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मंजूर की है। इस राशि से धार्मिक, सीमावर्ती और दूरदराज के पर्यटन स्थलों पर सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यह जानकारी संसद के हाल में संपन्न मानसून सत्र के दौरान साझा की गई। मंजूर की गई सहायता में ऊना के मां चिंतपूर्णी मंदिर के विकास के लिए 56.26 करोड़ रुपये शामिल हैं। किन्नौर के रकछम और लाहौल-स्पीति के काजा में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार के लिए 24.82 करोड़ रुपये दिए गए हैं। यह राशि धार्मिक, सीमावर्ती और दूरदराज के पर्यटन स्थलों पर सुविधाएं विकसित करने के लिए है। मां चिंतपूर्णी मंदिर में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए यह राशि खर्च होगी। इससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और स्थानीय कारोबार को लाभ मिलने की उम्मीद है। रकछम किन्नौर की सांगला घाटी में भारत-तिब्बत वास्तविक नियंत्रण रेखा के निकट स्थित है।

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काजा स्पीति घाटी का प्रमुख प्रशासनिक केंद्र है। इन दूरदराज और रणनीतिक क्षेत्रों में पर्यटन ढांचा मजबूत होगा। इससे स्थानीय स्तर पर पर्यटन गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है। केंद्र ने हिमालयन सर्किट के विकास के लिए अलग से 68.34 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इससे शिमला, क्यारीघाट और हाटकोटी जैसे प्रमुख स्थलों पर सुविधाएं विकसित होंगी। मनाली, कांगड़ा, धर्मशाला और बीड़ भी इस विकास में शामिल हैं। पालमपुर और चंबा समेत अन्य पर्यटन स्थलों पर आधारभूत सुविधाओं को विकसित किया जाएगा। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि पर्यटन स्थलों का विकास राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है। हालांकि, पर्यटन मंत्रालय राज्यों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। यह सहायता स्वदेश दर्शन और प्रसाद जैसी योजनाओं के तहत दी जाती है। स्वदेश दर्शन 2.0 और चुनौती आधारित गंतव्य विकास भी इसमें शामिल हैं। यह सहायता उपलब्ध बजट और राज्य सरकार की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के आधार पर मिलती है।
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