पधर (मंडी)। जंगली गेंदे की खेती भी अब लोगों की आर्थिकी सुदृढ़ करने लगी है। इसमें सरकार की ओर से एक हेक्टेयर में जंगली गेंदे लगाने पर 30 हजार रुपये उपदान दिया जा रहा है। पधर उपमंडल के दर्शन लाल कहते हैं कि उन्होंने 12 बीघा भूमि में जंगली गेंदे की खेती शुरू की है। उद्यान विभाग से उन्हें महक योजना के तहत शेड बनाने के लिए 2.50 लाख की सब्सिडी मिली।
इसमें वह जंगली गेंदे के फूलों का भंडारण करते हैं। जंगली गेंदे की खेती वह पहले भी करते थे, लेकिन कटाई के बाद तेल निकालने के लिए फूल नेरचौक (मंडी) ले जाने पड़ते थे। हाल ही में हिमालय जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर ने तेल निकालने की यूनिट सिऊन पंचायत के कचोटधार में स्थापित की है। इससे उनके माल ढुलाई की लागत बच जाती है। जो भी ग्रामीण जंगली गेंदे के फूल उगा रहे हैं, उनसे 23 रुपये प्रति किलो की दर से फूल खरीदते हैं। इससे निकले तेल की कीमत बाजार में 12 से 15 हजार रुपए प्रति लीटर है। जंगली गेंदे की खेती से वह सालाना लगभग 2 लाख रुपये कमा लेते हैं।
....उपमंडल पधर में किसान-बागवान जंगली गेंदे की खेती कर रहे हैं। जलवायु उपयुक्त होने से इस क्षेत्र में जंगली गेंदे की खेती की अच्छी संभावनाएं हैं। साथ ही इसमें पारंपरिक खेती की तरह बहुत ज्यादा मेहनत भी नहीं करना पड़ती। जंगली जानवर भी इसे नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।
-कविता शर्मा, उद्यान विकास अधिकारी
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