थुनाग में तबाही के बीच मलबे के ढेर में लापता लोगों को तलाश करते हुए एनडीआरएफ के जवान। स्त्रोतथु
थुनाग (मंडी)। सराज क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा के कारण सड़कें और संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ऐसे में पुरानी पगडंडियां फंसे लोगों के लिए जीवन रेखा बन रही हैं। इन्हें सड़कों के बनने के बाद भुला दिया गया था। ये पगडंडियां न केवल राहत सामग्री पहुंचाने का जरिया बनी हैं, बल्कि बचाव कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। घोड़े और खच्चर इन्हीं पगडंडियों से गांव-गांव तक भोजन, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान पहुंचा रहे हैं।
शुक्रवार को भारतीय सेना ने बगस्याड़ से थुनाग तक जंगल के रास्ते एक पैदल मार्ग तैयार किया। यह पगडंडी अब राहत सामग्री वितरण और रेस्क्यू ऑपरेशन का आधार बन रही है। जिला राजस्व अधिकारी हरीश की रिपोर्ट के अनुसार, इस मार्ग का उपयोग कर आपदा प्रभावितों तक तत्काल मदद पहुंचाई जा रही है।
थुनाग से लंबाथाच तक राहकोट होकर मात्र ढाई किलोमीटर का रास्ता है। इसी तरह लंबाथाच से शिल्ही बागी और चिऊणी के लिए भी पगडंडियां हैं जो संकट की घड़ी में कारगर साबित हो रही हैं। सराज की अधिकांश सड़कें भूस्खलन और भारी बारिश से क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। इनके पुनर्निर्माण में समय लगेगा। सेना ने थुनाग में बेस कैंप स्थापित किया है, जहां से राहत कार्यों का संचालन किया जा रहा है।
आईटीबीपी के जवान जंजैहली पहुंच चुके हैं और प्रभावित क्षेत्रों में मदद पहुंचा रहे हैं। सरकार ने थुनाग, बगस्याड़ और मंडी में तीन समन्वयक अधिकारी नियुक्त किए हैं, जबकि एक राजस्व अधिकारी जंजैहली में तैनात है। जिला मुख्यालय मंडी से निगरानी जारी है।
...
सेना और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से सराज धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा है। डीएफओ नाचन सुरेंद्र कश्यप ने बताया कि आपदा के दौरान जंगल के शॉर्टकट रास्ते आपदा से घिरे लोगों के लिए वरदान बन रहे हैं। वन मित्र और वन रक्षक इन रास्तों और पगडंडियों को बहाल करने में जुटे हुए हैं।