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शिक्षक संघ बोला, वेतन विसंगति दूर करे सरकार

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सुंदरनगर (मंडी)। वेतन आयोग की विसंगतियां बढ़ने से प्राथमिक शिक्षक वर्ग खासा परेशान है। वेतन आयोग में वर्ष 2012 के पुन: संशोधन के समय जेबीटी और टीजीटी का पे-बैंड 10,300-34,800 रुपये तय हुआ था। जेबीटी की ग्रेड पे 4200 रुपये के साथ 14,500 रुपये और टीजीटी वर्ग की ग्रेड-पे 5000 रुपये के साथ 15,300 रुपये थी।
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नए वेतन आयोग ने इसे 800 रुपये के फासले को मूल वेतन में ही 8000 रुपये मासिक कर दिया है। डीए बढ़ाने के साथ यह फासला अगले वेतन आयोग तक करीब दस हजार रुपये मासिक हो जाएगा। हिमाचल प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ सुंदरनगर-प्रथम के प्रधान नरेश ठाकुर ने कहा कि ऐसे में कम स्केल मिलने के चलते जेबीटी वर्ग को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
नरेश ठाकुर ने सरकार से इस मामले में संज्ञान लेने का आग्रह करते हुए कहा कि जेबीटी अध्यापकों को 2012 से ही प्रारंभिक वेतन 16,290 दिया जाना चाहिए, ताकि विसंगतियां पैदा न हों और साथ ही सरकार से 4-9-14 की वेतन वृद्धि जो हायर ग्रेड पे के कारण 2012 से बंद की है, उसे भी तुरंत प्रभाव से लागू करे। उन्होंने कहा कि नए पे कमीशन के अनुसार जेबीटी का 29,710 आरंभिक वेतन और टीजीटी का 38,100 रुपये आरंभिक वेतन है। यानी जेबीटी को 800 रुपये के ग्रेड पे के अंतर की जगह टीजीटी से लगभग 8000 रुपये कम वेतन मिलेगा। उन्होंने कहा कि अगर हायर ग्रेड लाभ मिला तो टीजीटी का मूल वेतन 48,700 रुपये और जेबीटी वर्ग का 43,000 रुपये होगा यानी 5,700 रुपये का फासला आरंभिक वेतन में यथावत रहेगा।
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उन्होंने शिक्षक हित में सवाल किया है कि ऐसा कौन सा पे कमीशन सरकार की ओर से लागू कर दिया गया जिससे 800 रुपये का अंतर आज आठ हजार से ऊपर चला गया। संघ ने सरकार से मांग की है कि इस विषय पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जाए।
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