गांधी वाटिका के जीर्णोद्धार पर 30 लाख खर्च करने और रखरखाव पर उठने लगे सवाल
बच्चों के मंनोरंजन के लिए स्थापित झूले और जिम उपकरण भी टूटे
संवाद न्यूज एजेंसी
जोगिंद्रनगर (मंडी)। नगर परिषद जोगिंद्रनगर की एकमात्र गांधी वाटिका के जीर्णोद्धार पर खर्च हो रही लाखों रुपये की राशि से भले ही सुविधाओं और संसाधनों में विस्तार के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इसके रखरखाव पर बरती जा रही लापरवाही से इसकी सुंदरता को भी ग्रहण लगना शुरू हो गया है।
वाटर फाउंटेन पर पानी की जगह घास उगना शुरू हो चुकी है और खुले में फैल रही गंदगी से इसकी स्वच्छता पर भी दाग लगा है। वाटिका में हर रोज सुबह और शाम की सैर और दोपहर में अपनी थकान मिटाने के लिए पहुंच रहे हर वर्ग के लोगों के लिए विभिन्न प्रकार की सुविधाएं नगर परिषद के माध्यम से उपलब्ध करवाई गई हैं, लेकिन इसके रखरखाव और स्वच्छता को लेकर बरती जा रही लापरवाही से गांधी वाटिका की सुंदरता पर भी सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
हैरत की बात है कि कूड़ेदान कचरे के ढेरों से लबालब हो गए हैं और समय पर इसे खाली न करने से यह गंदगी गांधी वाटिका परिसर में फैल रही है। वाटिका में सीढि़यों पर ग्रेनाइट बिछा है, लेकिन सफाई पुख्ता न होने से इसका इस्तेमाल भी लोग नहीं कर पा रहे हैं। वाटिका में पौधरोपण कर जो इसकी सुंदरता को चार चांद लगाने के प्रयास नगर परिषद ने किए थे इसका भी हाल बदहाल है। वहीं, छोटे बच्चों के मंनोरंजन के लिए स्थापित झूले और जिम उपकरण भी टूट फूट जाने से आम लोगों को सुविधाओं और संसाधनों का लाभ अधिक नहीं मिल पा रहा है।
गांधी वाटिका का कायाकल्प अनुमानित 30 लाख रुपये से हो रहा है। करीब 17 लाख इसकी सुंदरता पर खर्च किए जा चुके हैं। करीब 13 लाख और खर्च कर इसे आकर्षक बनाने का प्रयास नगर परिषद कर रही है, लेकिन रखरखाव को लेकर कोई भी गंभीर नहीं है। नगर परिषद जोगिंद्रनगर के कार्यकारी अधिकारी आदित्य चौहान ने बताया कि वाटिका के सौंदर्यीकरण को लेकर नगर परिषद के प्रयास जारी हैं। कहा, बहरहाल वाटिका में जो कमियां उजागर हुई हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से दुरुस्त करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। सफाई का कार्य भी जारी है।
जोगिंद्रनगर स्थित गांधी वाटिका परिसर में कूड़ा न उठने से डस्टबिन के बाहर गिरता कूड़ा। संवाद