मंडी। अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव में भाग लेने के लिए देव ऋषि पराशर 13 फरवरी सुबह आठ बजे अपने मूल भंडार (कोठी) बांधी से पैदल रवाना होंगे। देव ऋषि पराशर का रास्ते में श्रद्धालुओं के घर पहला ठहराव बरोण गांव हणोगी में होगा। 14 फरवरी को दूसरा ठहराव पंडोह और 15 फरवरी को अपने 400 देवलुओं के साथ मंडी में राज बेहड़े में पहुंचेंगे। मंडी पहुंचने पर देवता का स्वागत गुरुद्वारा के पास राज देवता माधो राय की छड़ी से किया जाएगा।
देव ऋषि पराशर राज देवता के साथ भव्य मिलन कर राज बेहड़े में विराजमान रहेंगे। अकूत संपत्ति के मालिक देव पराशर ऋषि मंडी राजघराने के कुल देवता होने के कारण उन्हें आशीर्वाद देते हैं। राजघराने का कुल देवता होने के कारण ऋषि पराशर की मंडी महाशिवरात्रि में महत्वपूर्ण भूमिका है।
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21 को रूपेश्वरी बेहड़े में होगी जाग
महाशिवरात्रि महोत्सव के दौरान रूपेश्वरी बेहड़े में होने वाली पराशर ऋषि की जाग 21 फरवरी को शाम करीब 7 बजे आयोजित होगी। मेले के दौरान हर वर्ष जाग का आयोजन किया जाता है। महाशिवरात्रि में ऋषि पराशर जाग की अनूठी प्राचीन परंपरा का आज भी बखूबी निर्वहन किया जाता है। ऋषि पराशर का गूर खेलकर जाग के कुंड में आहुति देते हैं। इसके बाद ऋषि शुकदेव का गूर खेलता है और उसके बाद अलग-अलग देवी-देवताओं के गूर भी अपने-अपने क्रमानुसार खेलते हैं। इस परंपरा का आयोजन रियासत काल से चला आ रहा है।
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पैगोड़ा शैली में है मंदिर का निर्माण
देव पराशर ऋषि का मंदिर मंडी शहर से लगभग 45 किलोमीटर दूर उत्तर में 2,730 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह स्थान ऋषि पराशर की तपस्थली माना जाता है, जहां 13वीं-14वीं शताब्दी में राजा बाणसेन की ओर से निर्मित पैगोड़ा शैली का मंदिर है। यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुंदरता, द्वीप और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर परिसर में देवता की झील अपनी ओर आकर्षित करती है।