राज माता बुसाई कैहनवाल मंडी का रथ। स्रोत जागरूक पाठक
मंडी। अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव की रौनक बढ़ाने के लिए कैहनवाल से राजमाता बुसाई बगलामुखी अपने लाव-लश्कर और हारियानों के साथ 15 फरवरी को प्रस्थान करेंगी। शक्ति और भक्ति के इस अनूठे मिलन को लेकर क्षेत्र के श्रद्धालुओं में उत्साह है।
राजमाता बुसाई बगलामुखी अपने भंडार से दोपहर ठीक 1 बजे प्रस्थान करेंगी। मां के साथ उनके अनन्य भक्त, हारियान और पारंपरिक लाव-लश्कर मौजूद रहेगा। मंडी शहर पहुंचने पर माता सबसे पहले मंडी के आराध्य राजदेवता माधोराय से मिलन कर अन्य नरोल देवियों के साथ राजबेहड़े में विराजमान होंगी।
आठवीं महाविद्या मां बगलामुखी (पीताम्बरा देवी) 10 महाविद्याओं में आठवीं हैं। इन्हें शत्रुओं पर विजय और कष्टों के निवारण की देवी माना जाता है। महाशिवरात्रि पर भगवान शिव और मां बगलामुखी (पार्वती स्वरूप) का मिलन आध्यात्मिक ऊर्जा के संचार के लिए उत्तम माना जाता है। इस पूरी यात्रा और साधना के दौरान पीले रंग का विशेष महत्व रहता है, जो देवी को अत्यंत प्रिय है। मंडी शहर से 14 किलोमीटर दूर स्थित कैहनवाल में माता का भव्य मंदिर है।
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आज मंडी कोठी में पहुंचेंगे देव शुकदेव ऋषि थट्टा
अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव में भाग लेने के लिए शुकदेव ऋषि थट्टा शुक्रवार सुबह 9 बजे अपने मूल स्थान थट्टा से पैदल रवाना होंगे और शाम 5 बजे अपनी भ्यूली कोठी में प्रस्थान करेंगे। देवता ढोल नगाड़ों सहित अपने 400 देवलुओं के साथ शाम मंडी पहुंचेंगे। देवता का रात्रि ठहराव भ्यूली में और 14 फरवरी को देवता का गुरुद्वारा के पास राज देवता माधो राय की छड़ी के साथ स्वागत होगा। शुकदेव ऋषि को मंडी रियासत की रानी किरन कुमारी की ओर से बेहड़े में भव्य मंदिर बनाने के लिए स्थान उपलब्ध करवाया है।
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शुकदेव ऋषि का मंडी जनपद में विशेष स्थान है। महाशिवरात्रि मेले के लिए शुकदेव ऋषि 13 फरवरी को अपने मूल स्थान से सैकड़ों देवलुओं के साथ रवाना होंगे। 14 को शुकदेव ऋषि मंडी शहर में आगमन करेंगे। राजमहल स्थित अपने मंदिर में विराजमान होंगे।
मोहन लाल, कार्यकारिणी सदस्य, शुकदेव ऋषि
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