जनपद के अधिष्ठाता बड़ा देव कमरूनाग के ऐतिहासिक सरानाहुली मेले में इस बार
पशु बलि नहीं होगी। हाईकोर्ट के आदेशों के बाद पहली बार देवता के मेले में
मुंडन संस्कारों के साथ होने वाली पशु बलि पर पूर्णतया रोक लगा दी गई है।
पुलिस प्रशासन ने इस संदर्भ में देवता कमेटी को साफ निर्देश दिए हैं कि
मेले में किसी भी प्रकार की कोई पशु बलि नहीं करवाई जाए। आषाढ़
संक्रांति के दिन आगामी 15 जून को देवता का ऐतिहासिक सरानाहुली मेला
हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। जिसके लिए देवता कमेटी और कारदारों ने
तैयारियां शुरू कर दी हैं। डीएसपी हेडक्वार्टर राजेश कुमार ने बताया कि इस
बार कमरूनाग मेले में पशु बलि नहीं होगी। मेला स्थल पर चप्पे-चप्पे पर
पुलिस का पहरा होगा तथा पशु बलि देने वालों के खिलाफ पुलिस सख्त कार्रवाई
करेगी।
एसएचओ गोहर लाल सिंह ने जिला पुलिस से अतिरिक्त पुलिस बल की मांग
करते हुए एसपी मंडी को पत्र लिखा है। जिसमें मेले के दौरान पशु बलि पर
निगरानी रखने को लेकर जिला से पुलिस कर्मियों का सहयोग मांगा गया है। बताया
जा रहा है कि आगामी एक दो दिनों के भीतर गोहर पुलिस थाना में बड़ा देव
कमरूनाग के सरानाहुली मेले को लेकर पुलिस और देव कमरूनाग कमेटी के साथ
डीएसपी बैठक लेंगे। जिसमें मेले के आयोजन और पशु बलि को लेकर रणनीति तैयार
की जाएगी। देव कमरूनाग के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा कि सरानाहुली मेले
में बकरे नहीं कटेंगे। देवता के कटवाल रणजीत सिंह ठाकुर ने बताया कि मेले
की तैयारियां जोर शोर से शुरू हो गई है।
बॉक्स : पशु बलि को लेकर
हाईकोर्ट में दी गई याचिका में प्रदेश के अनेक मंदिरों के साथ याचिकाकर्ता
ने कमरूनाग मंदिर का भी हवाला दिया था। जहां धर्म के नाम पर अनेक बकरों की
बलि की बात कहीं गई थी।